Kuwait New Rule: कुवैत में स्कूल ट्रांसफर और दस्तावेजों के लिए नया नियम लागू, अब देना होगा फाइनेंशियल क्लीयरेंस.

कुवैत में रहने वाले प्रवासी परिवारों और खासकर भारतीय समुदाय के लिए एक बहुत जरूरी खबर सामने आई है। कुवैत सरकार ने स्कूलों में पढ़ाई कर रहे बच्चों के ट्रांसफर और उनके जरूरी दस्तावेजों को लेकर एक कड़ा नया नियम लागू कर दिया है। अब किसी भी स्कूल से बच्चे का ट्रांसफर करवाने या फिर उसके पढ़ाई से जुड़े कागजात हासिल करने के लिए माता-पिता को पहले वित्तीय क्लीयरेंस लेनी होगी। शिक्षा मंत्री Syed Jalal Al-Tabatabai ने 8 सितंबर 2026 को यह नया ministerial decision जारी किया है जो तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है। इस नए नियम के तहत अब सरकारी और प्राइवेट दोनों तरह के स्कूलों के रिकॉर्ड में किसी भी तरह का बकाया पैसा नहीं होना चाहिए तभी आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
भारतीय प्रवासियों पर पड़ेगा सीधा असर
यह नया नियम कुवैत में रह रहे लाखों प्रवासियों और विशेष रूप से भारतीय समुदाय के लिए बहुत मायने रखता है। भारतीय दूतावास कुवैत के आंकड़ों के अनुसार, वहां पर सीबीएसई से जुड़े कुल 26 स्कूल चल रहे हैं जिनमें 60,000 से ज्यादा छात्र पढ़ाई करते हैं। कुवैत में कुल भारतीय आबादी 10 लाख से भी ज्यादा है, इसलिए इस देशव्यापी नियम का असर बहुत सारे घरों पर पड़ेगा। यह नियम शिक्षा के हर स्तर पर लागू होता है और इसमें सरकारी स्कूलों के साथ-साथ प्राइवेट और भारतीय पाठ्यक्रम वाले स्कूल भी शामिल हैं। जिन माता-पिता के बच्चों का बकाया फीस या अन्य भुगतान बाकी है, उन्हें अब स्कूल बदलने या दूसरे देश जाने में परेशानी आ सकती है।
स्थानांतरण और दस्तावेजों के लिए जरूरी शर्तें
नए आदेश के मुताबिक, अगर किसी भी तरह की वित्तीय देनदारी बाकी है तो छात्र की फाइल को एक जगह से दूसरी जगह ट्रांसफर नहीं किया जाएगा और न ही कोई आधिकारिक कागजात जारी किया जाएगा। सभी बकाया राशि की जांच होने के बाद क्लीयरेंस सर्टिफिकेट ऑनलाइन या फिर कागज के रूप में मिल जाएगा। यह नियम उन परिवारों के लिए बहुत जरूरी है जो भारत वापस लौट रहे हैं, किसी दूसरे खाड़ी देश में जा रहे हैं या फिर नौकरी बदलने या अन्य प्रशासनिक कामों की वजह से कुवैत के अंदर ही दूसरा स्कूल चुन रहे हैं। माता-पिता को यह बात ध्यान रखनी होगी कि वित्तीय जिम्मेदारियों में सिर्फ ट्यूशन फीस ही शामिल नहीं है, बल्कि ट्रांसपोर्ट का खर्चा और स्कूल द्वारा मंजूर किए गए अन्य शुल्क भी शामिल हैं।
अकाउंट विभाग से पहले ही कर लें बातचीत
मंत्रालय की तरफ से माता-पिता को सलाह दी गई है कि वे आखिरी समय में भुगतान करने के बजाय पहले ही स्कूल के वित्त विभाग से अपने खाते की स्थिति की जांच कर लें। जिन परिवारों को फीस की रकम को लेकर किसी भी तरह की असहमति या विवाद है, उन्हें सलाह दी जाती है कि वे स्कूल के अकाउंट ऑफिस से बात करके मामला सुलझा लें और लिखित में स्टेटमेंट ले लें। अगर कोई भी बकाया राशि बाकी पाई जाती है तो ट्रांसफर के लिए दिया गया आवेदन रद्द कर दिया जाएगा। चूंकि यह नया फैसला पहले के सभी विरोधी सर्कुलर को रद्द करता है, इसलिए जिन माता-पिता को अपने बच्चों के शैक्षणिक दस्तावेजों की जरूरत है, वे बिना किसी देरी के अपना सारा हिसाब चुकता कर लें ताकि बच्चों की फाइल ट्रांसफर होने में या नए स्कूल में एडमिशन की आखिरी तारीख निकलने में कोई रुकावट न आए।