Kuwait पर ईरान का बड़ा हमला, एयर डिफेंस सिस्टम ने हवा में रोक 1 सितंबर 2026 को कई ड्रोन और मिसाइल.

कुवैत देश में अचानक से हवाई सुरक्षा प्रणालियों ने ईरान की तरफ से आए मिसाइल और ड्रोन हमलों को हवा में ही नाकाम करना शुरू कर दिया है। 1 सितंबर 2026 की तारीख को कुवैत के आसमान में अचानक सायरन बजने लगे और लोगों में अफरातफरी का माहौल देखने को मिला। कुवैत की सेना ने इस बात की पुष्टि की है कि देश के डिफेंस सिस्टम ने दुश्मन के कई ड्रोनों को मार गिराया है और इसे ईरान की सीधी आक्रामकता माना जा रहा है। सरकारी समाचार एजेंसी KUNA के मुताबिक, आसमान में जो जोरदार धमाके सुने गए थे, वे असल में देश की सुरक्षा प्रणाली द्वारा किए गए सफल इंटरसेप्शन थे।
क्षेत्रीय तनाव और अमेरिका-ईरान संघर्ष
यह पूरी घटना अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे पुराने तनाव और हालिया सैन्य हमलों के बाद बहुत तेजी से बढ़ी है। अमेरिका ने हाल ही में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC के ठिकानों पर फिर से हमले किए थे, जिसके जवाब में ईरान की तरफ से कड़ा रुख अपनाया गया है। ईरानी सैन्य प्रवक्ता इब्राहिम जोलफाघारी ने खुले तौर पर चेतावनी दी थी कि उनका देश अब बहरीन और कुवैत के मामले में किसी भी तरह का संयम नहीं बरतेगा और अमेरिकी हितों को तहस-नहस करने के लिए कड़े कदम उठाएगा। IRGC ने बहरीन स्थित शेख ईसा एयर बेस पर अमेरिकी ताकतों और रडार ठिकानों को निशाना बनाकर कामिकेज ड्रोन से बड़ा हमला करने की बात भी स्वीकार की है।
कुवैत और बहरीन पर मंडराया खतरा
केवल कुवैत ही नहीं बल्कि बहरीन और जॉर्डन में भी अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया गया है, जहां जॉर्डन के सैन्य अधिकारियों ने 13 में से 10 ईरानी मिसाइलों को हवा में ही नष्ट करने की पुष्टि की है। कुवैत के विदेश मंत्रालय ने इन सभी हमलों की बहुत कड़े शब्दों में निंदा की है और इसके लिए सीधे तौर पर ईरान को जिम्मेदार ठहराया है। मंत्रालय ने यह भी साफ कर दिया है कि देश की सुरक्षा और संप्रभुता उनके लिए एक लाल रेखा यानी 'रेड लाइन' है और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के दायरे में रहते हुए देश की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाया जाएगा। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी अमेरिकी कार्रवाइयों को बड़ा और शक्तिशाली बताया है और चेतावनी दी है कि यदि आगे भी कोई जवाबी हमला किया गया तो उसका बहुत सख्त जवाब दिया जाएगा।
प्रवासियों और आम लोगों पर असर
इस पूरे तनाव के कारण खाड़ी देशों में रहने वाले लाखों प्रवासियों और कामगारों की चिंता काफी बढ़ गई है, जिनमें बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक भी शामिल जो रोजगार के लिए इन देशों में रहते हैं या अक्सर यात्रा करते हैं। साल 2026 की शुरुआत में भी कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर ड्रोन हमलों की वजह से रडार सिस्टम, ईंधन टैंकों और सैन्य शिविरों के साथ-साथ मीना अल-अहमदी रिफाइनरी को काफी नुकसान पहुंचा था। ताजा हालात की जानकारी सबसे पहले @SaudiNews50 अकाउंट के जरिए 1 सितंबर 2026 की रात को सामने आई थी, जिसके बाद से पूरे इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और लोगों से सतर्क रहने की अपील की जा रही है।