Kuwait ने यरुशलम के अधिकारों के लिए उठाया बड़ा कदम, यूएन बैठक में की फिलिस्तीन की बात

कुवैत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर यरुशलम की स्थिति को बचाने के लिए एक अहम कूटनीतिक पहल में हिस्सा लिया है। कुवैत के विदेश मंत्री Sheikh Jarrah Jaber Al-Ahmad Al-Sabah ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित अरब लीग और इस्लामिक सहयोग संगठन की संयुक्त मंत्रिस्तरीय बैठक में भाग लिया। यह महत्वपूर्ण सत्र 26 सितंबर 2026 को 81वीं यूएन महासभा के उच्च स्तरीय सप्ताह के दौरान हुआ था, जिसका मुख्य उद्देश्य यरुशलम की ऐतिहासिक और कानूनी स्थिति को बनाए रखना और उसके पवित्र स्थलों की रक्षा करना था।
फिलिस्तीनी अधिकारों का समर्थन और कूटनीतिक प्रयास
इस मंत्रिस्तरीय बैठक में अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के अनुसार फिलिस्तीनी लोगों के वैध अधिकारों का पूरा समर्थन करने पर जोर दिया गया। यह कूटनीतिक कदम संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान चल रहे व्यापक क्षेत्रीय प्रयासों के साथ मेल खाता है, जिसकी शुरुआत 8 सितंबर 2026 को हुई थी। इस सिलसिले में, सप्ताह की शुरुआत में 24 सितंबर 2026 को कुवैत के क्राउन प्रिंस Sheikh Sabah Khaled Al-Hamad Al-Sabah ने महासभा को संबोधित किया था। उन्होंने अपनी बात में यह दोहराया कि क्षेत्र में स्थायी शांति पाने के लिए इजरायली कब्जे को खत्म करना जरूरी है और पूर्वी यरुशलम को राजधानी बनाकर एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य का गठन होना चाहिए। इस बारे में अधिक जानकारी DFAT की आधिकारिक वेबसाइट पर देखी जा सकती है।
अल-अक्सा मस्जिद की घटना पर कुवैत की कड़ी आपत्ति
कुवैत की हालिया कूटनीतिक गतिविधियों में इजरायली राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री Itamar Ben-Gvir द्वारा 21 सितंबर 2026 को अल-अक्सा मस्जिद परिसर के दौरे की कड़ी निंदा भी शामिल है। कुवैत के विदेश मंत्रालय ने इस यात्रा को एक भड़काने वाला काम बताया और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन करार दिया। मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ऐसी घटनाओं के खिलाफ सख्त और निर्णायक कदम उठाने की अपील की ताकि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनी रहे।