Kuwait News: अमेरिका के नए टैरिफ नियमों से कुवैत को सबसे कम नुकसान, जानिए क्या है पूरा मामला.

Sushma Kumari14 September 20262 min read34 viewsKuwait
Kuwait News: अमेरिका के नए टैरिफ नियमों से कुवैत को सबसे कम नुकसान, जानिए क्या है पूरा मामला.

अमेरिका की तरफ से हाल ही में आयात शुल्क यानी US tariffs को लेकर एक नया नियम लागू किया गया है, जिससे पूरी दुनिया के व्यापार पर असर पड़ रहा है। लेकिन इस नए नियम का सबसे कम असर खाड़ी देशों यानी GCC में से सिर्फ Kuwait पर पड़ेगा। टाइम्स कुवैत की एक रिपोर्ट के अनुसार, साल 2025 के आंकड़ों से यह बात सामने आई है कि अमेरिका को होने वाले निर्यात में कुवैत की हिस्सेदारी 3 percent से भी कम थी, जो बाकी सभी खाड़ी देशों के मुकाबले सबसे कम है।

अमेरिका का नया टैरिफ नियम और उसकी वजह

यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव यानी USTR के प्रमुख Jamieson Greer की देखरेख में यह नया टैरिफ कानून July 24, 2026 से लागू किया गया है। इसके तहत करीब 60 देशों पर 10 percent से लेकर 12.5 percent तक का टैक्स लगाया गया है। इस नियम को लाने के पीछे मुख्य वजह यह बताई गई है कि जिन देशों ने जबरन श्रम यानी forced labor से बने सामानों को अपनी सप्लाई चेन में आने से रोकने के लिए कड़े कदम नहीं उठाए, उन्हें इस भारी-भरकम टैक्स का सामना करना पड़ रहा है। जिन देशों नेforced labor पर रोक लगाई है, उन्हें 10 percent की दर पर रखा गया है, जबकि चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों के लिए यह टैक्स बढ़ाकर 12.5 percent कर दिया गया है।

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खाड़ी देशों पर कितना पड़ेगा असर

अमेरिका के इस नए टैक्स नियम से कुवैत और बाकी खाड़ी देशों पर शुरुआती दौर में बहुत कम असर पड़ने की उम्मीद जताई जा रही है। इससे लगभग $5 billion to $6 billion मूल्य के सामान प्रभावित होंगे, जो कि पूरे जीसीसी की कुल जीडीपी यानी Gross Domestic Product का लगभग 0.3 percent बनता है। राहत की बात यह है कि एनर्जी प्रोडक्ट्स, यानी ऊर्जा से जुड़े उत्पाद, जो साल 2025 में अमेरिका को भेजे गए कुल खाड़ी देशों के निर्यात का लगभग 50 percent थे, उन्हें इस टैक्स से पूरी तरह बाहर रखा गया है। कुवैत के मुकाबले बहरीन और ओमान का अमेरिका को होने वाला निर्यात साल 2025 में क्रमशः 9.3 percent और 5.8 percent दर्ज किया गया था, जो कुवैत से काफी ज्यादा है।

क्षेत्रीय चुनौतियां और एशियाई बाजारों पर भरोसा

ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी व्यापार नीतियों की तुलना में क्षेत्रीय तनाव और व्यापार में रुकावटें खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था के लिए ज्यादा बड़ी मुसीबतें बनी हुई हैं। हालांकि ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स ने साल 2026 के लिए जीसीसी की जीडीपी में 5.4 percent की गिरावट आने का अनुमान लगाया है, लेकिन साथ ही यह भी कहा गया है कि साल 2027 में इसमें 6.8 percent की जोरदार रिकवरी देखने को मिलेगी। अमेरिका से घटती मांग की भरपाई के लिए खाड़ी देश अब एशियाई बाजारों का तेजी से सहारा ले रहे हैं, क्योंकि साल 2025 में जीसीसी के कुल निर्यात का लगभग आधा हिस्सा एशियाई बाजारों में ही गया था।

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