सऊदी अरब और कुवैत कुवैती तेल को लाल सागर पाइपलाइन से जोड़ने पर चर्चा में

रियाद (सऊदी अरब): सऊदी अरब और कुवैत इस प्रस्ताव पर बातचीत कर रहे हैं कि कुवैती तेल निर्यात को ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन, जिसे पेट्रोलाइन भी कहते हैं, के जरिए लाल सागर से जोड़ा जाए। इस अध्ययन की खबर 13 अक्टूबर 2026 की रिपोर्टों में आई, जिसके बाद सऊदी नेतृत्व की ओर से आधिकारिक बयान सामने आए।
सोमवार 12 अक्टूबर 2026 को रियाद में WPC एनर्जी कांग्रेस के दौरान सऊदी ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअजीज बिन सलमान ने कहा कि देश वैकल्पिक निर्यात मार्गों के लिए अंतरराष्ट्रीय साझेदारी खोज रहा है। उन्होंने बताया कि कुवैत समेत कई देशों के साथ सऊदी पाइपलाइनों में अंतरराष्ट्रीय स्वामित्व और वित्तपोषण की संभावनाओं पर चर्चा चल रही है। प्रिंस अब्दुलअजीज के मुताबिक व्यापक अंतरराष्ट्रीय भागीदारी से इस अहम ढांचे की सुरक्षा और संरक्षण बढ़ेगा।
इसी दौरान सऊदी अरब ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन का विस्तार भी कर रहा है। इसकी मौजूदा अधिकतम क्षमता 70 लाख बैरल प्रति दिन है, जिसे अगले दो से तीन वर्षों में बढ़ाकर 1 करोड़ बैरल प्रति दिन करने का लक्ष्य है। इस कदम को निर्यात को मजबूत करने और होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाले जहाज़ी परिवहन पर निर्भरता घटाने की रणनीति से जोड़ा गया है।
पाइपलाइन को हाल में परिचालन संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। सितंबर में और 5 अक्टूबर 2026 को ड्रोन हमलों के बाद इसका संचालन कुछ समय के लिए रोकना पड़ा था। बाद में काम फिर शुरू हो गया, और 6 अक्टूबर 2026 तक इसके जरिए रोजाना 58 लाख बैरल तेल भेजा जा रहा था।
सऊदी अरामको एक प्राकृतिक गैस पाइपलाइन को अस्थायी रूप से कच्चे तेल के परिवहन के लिए बदलने पर काम कर रही है। इससे 12 लाख बैरल प्रति दिन की अतिरिक्त क्षमता सात से आठ हफ्तों में जुड़ने की उम्मीद है।
ये घटनाक्रम होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंताओं के बीच सामने आए हैं। यह समुद्री रास्ता कुवैत, कतर और बहरीन जैसे खाड़ी देशों के लिए पहले भी आर्थिक व्यवधान का कारण बन चुका है, और इन देशों के पास निर्यात के विविध रास्ते नहीं हैं।