कुवैत हॉर्मुज़ बचाकर लाल सागर और यूएई तक तेल पाइपलाइन का अध्ययन शुरू

कुवैत: कुवैत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (KPC) ने तेल निर्यात के वैकल्पिक रास्ते तलाशने के लिए व्यवहार्यता अध्ययन शुरू कर दिया है। इसका मकसद हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को बायपास करते हुए सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के मौजूदा तेल ढांचे से जुड़ना है।
कुवैत ऑयल कंपनी के योजना और नवाचार विभाग के उप मुख्य कार्यकारी मोहम्मद अल-अब्दुलजलील ने 13 अक्टूबर 2026 को पुष्टि की कि ये परियोजनाएं अभी शुरुआती चरण में हैं। उन्होंने बताया कि क्षेत्रीय साझेदारों के साथ समझौते हो चुके हैं, ताकि रूट की तकनीकी और रणनीतिक व्यवहार्यता जांची जा सके।
पहली प्रस्तावित योजना में कुवैत के अल-अहमदी क्षेत्र से सऊदी लाल सागर तट तक पाइपलाइन बिछाने की बात है, जिसके लिए सऊदी अरब की मौजूदा ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन प्रणाली का इस्तेमाल होगा। दूसरी परियोजना में अल-अहमदी को यूएई के फुजैरा से हबशान-फुजैरा पाइपलाइन के जरिए जोड़ने का प्रस्ताव है।
इन ढांचागत परियोजनाओं के निर्माण में चार से पांच साल लगने का अनुमान है। अल-अब्दुलजलील के अनुसार अभी इनकी समयसीमा इसी आधार पर तय है।
रियाद में 11 से 15 अक्टूबर 2026 तक चली 25वीं विश्व पेट्रोलियम कांग्रेस के दौरान सऊदी ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअजीज बिन सलमान ने ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन की क्षमता को मौजूदा 70 लाख बैरल प्रति दिन से बढ़ाकर लगभग एक करोड़ बैरल प्रति दिन करने की योजना बताई। यह विस्तार अगले दो से तीन साल में होना है। मंत्री ने कहा कि पंपिंग स्टेशनों और परिवहन लाइनों का उन्नयन वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की स्थिरता के लिए रणनीतिक प्राथमिकता है।
कुवैत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन के मुख्य कार्यकारी शेख नवाफ अल-सबाह ने 13 अक्टूबर 2026 को बताया कि कॉरपोरेशन 2035 तक 40 लाख बैरल प्रति दिन की उत्पादन क्षमता तक पहुंचना चाहता है। फिलहाल कुवैत का तेल उत्पादन संघर्ष से पहले के स्तर का 80 प्रतिशत है, और जहाज़ों से जुड़ी बाधाएं इसकी मुख्य सीमा बनी हुई हैं।
इसी बीच दोनों देशों के ऊर्जा संबंध और मजबूत हुए हैं। कुवैत और सऊदी अरब ने 11 अक्टूबर 2026 को रियाद ऊर्जा सप्ताह के दौरान बिजली और नवीकरणीय ऊर्जा में सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।