Langtang Lirung: नेपाल में मंडरा रहा है बड़े हिमस्खलन का खतरा, वैज्ञानिक बोले.

नेपाल और तिब्बत की सीमा पर मौजूद हिमालयी पर्वत शिखर लांगटांग लिरुंग पर अभी भी खतरा टला नहीं है। हाल ही में नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के पीछे इसी पहाड़ का एक हिस्सा खिसकना मुख्य वजह बना था। अब चीन की तरफ से मिले नए सैटेलाइट चित्रों और आंकड़ों से यह बात सामने आई है कि उस जगह पर पहाड़ और हिमनदी का कुछ हिस्सा अभी भी काफी कमजोर हालत में लटका हुआ है। जल विज्ञान तथा जलस्रोत अनुसंधान केंद्र के उप कार्यकारी निदेशक विक्रम श्रेष्ठ ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी अनहोनी से पहले तैयारी की जा सके।
सैटेलाइट तस्वीरों में सामने आई बड़ी बात
चीन से जो ताजा तस्वीरें मिली हैं, उनके मुताबिक लांगटांग लिरुंग के जिस हिस्से से पहले चट्टानें और बर्फ नीचे गिरी थी, उसके पास का कुछ भाग अब भी अस्थिर है। हालांकि अधिकारी यह साफ नहीं कर पाए हैं कि यह बचा हुआ हिस्सा आकार में कितना बड़ा है और यह दोबारा कब नीचे खिसक सकता है। इसलिए केवल इन शुरुआती संकेतों को देखकर ही किसी तुरंत आने वाली बड़ी आपदा की भविष्यवाणी करना सही नहीं होगा। वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि इस इलाके में लगातार बदलाव हो रहे हैं, जिसे सामान्य भाषा में समझें तो पहाड़ के भीतर हलचल अभी थमी नहीं है।
विनाशकारी घटना के आंकड़े
आपको बता दें कि 26 अगस्त को नेपाल में जो भयानक बाढ़ आई थी, उसके पीछे का कारण इसी पहाड़ का खिसकना था। चीनी एकेडमी ऑफ साइंसेज के तिब्बती पठार अनुसंधान संस्थान के अध्ययन के मुताबिक, उस समय जो बर्फ और चट्टान का बड़ा टुकड़ा नीचे गिरा था, उसकी चौड़ाई करीब 980 मीटर और लंबाई लगभग 780 मीटर थी। इसका कुल क्षेत्रफल करीब 0.76 वर्ग किलोमीटर था और इसमें मलबे की मात्रा 7 करोड़ घनमीटर से भी ज्यादा आंकी गई थी। नीचे गिरते समय इस भारी मलबे ने रास्ते में आने वाली हर चीज को अपने साथ बहा दिया था और भारी तबाही मचाई थी।
पहाड़ी में बढ़ गई थी असामान्य हलचल
विशेषज्ञों द्वारा किए गए सैटेलाइट विश्लेषण से यह भी पता चला है कि घटना से ठीक पहले यानी 12 से 24 अगस्त के बीच उस पहाड़ी हिस्से में काफी अजीब हलचल देखने को मिली थी। उस दौरान चट्टानी हिस्सा रोजाना लगभग 0.4 मीटर की रफ्तार से अपनी जगह से खिसक रहा था। हालांकि जानकारों का यह भी मानना है कि यह सारी जानकारी घटना के बाद सामने आए विश्लेषण से मिली है, इसलिए उस वक्त इस बात की सटीक भविष्यवाणी करना मुमकिन नहीं था कि यह इतना बड़ा रूप ले लेगा।
बर्फ से ढकी झील बनी नई चिंता
सामने आई नई सैटेलाइट तस्वीरों में एक और चौंकाने वाली बात यह है कि उसी इलाके में एक झील अब बिल्कुल साफ दिखाई देने लगी है। यह झील पहले पूरी तरह से बर्फ से ढकी रहती थी। इसका क्षेत्रफल लगभग 0.19 वर्ग किलोमीटर है, जिसे आसान शब्दों में समझें तो यह करीब 27 अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल मैदानों के बराबर बड़ी है। हालांकि अभी तक इस बात की पुख्ता जानकारी नहीं मिल पाई है कि इस झील की गहराई कितनी है और इसमें कुल कितना पानी भरा हुआ है। वैज्ञानिक इस बात को लेकर भी फिक्रमंद हैं कि यदि इस झील का पानी रिसकर पहाड़ की दरारों के अंदर चला गया, तो इससे वहां की चट्टानों की मजबूती और ज्यादा कम हो सकती है।
लगातार निगरानी की है सख्त जरूरत
वैज्ञानिकों का मिलाजुला निष्कर्ष यही है कि लांगटांग लिरुंग पर्वत शिखर पर अभी भी कुछ बर्फ और चट्टानी हिस्से अपनी जगह पर कमजोर स्थिति में टिके हुए हैं। चूंकि इसके खिसकने का सही समय और इसके असर का कोई पक्का अनुमान अभी तक हाथ नहीं लगा है, इसलिए इस पूरे क्षेत्र की सैटेलाइट के जरिए लगातार निगरानी करना बहुत जरूरी हो गया है। जानकारी के लिए बता दें कि यह पूरा इलाका नेपाल और तिब्बत की सीमा पर स्थित है और इसकी कुल ऊंचाई 7,234 मीटर है। यह अपनी खड़ी ढलानों, खतरनाक ग्लेशियरों और विशाल चट्टानी बनावट के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है।