अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव को रोकने के लिए रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने तेहरान में ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरगची से मुलाकात की

तेहरान: रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को तेहरान पहुंचे, जहां उन्होंने अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अरगची के साथ उच्च स्तरीय बातचीत की। इस मुलाकात का मुख्य उद्देश्य अमेरिका के साथ चल रहे संघर्ष को कम करना और एक बड़े युद्ध को रोकना है। रूस ने चेतावनी दी है कि ऐसा युद्ध वैश्विक और मध्य पूर्व की स्थिरता के लिए खतरा बन सकता है।
रूसी विदेश मंत्रालय ने इन बातचीत को एक गंभीर अंतरराष्ट्रीय संकट की प्रतिक्रिया बताया है। मंत्रालय ने विशेष रूप से ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की कथित गैरकानूनी आक्रामकता का जिक्र किया। अब्बास अरगची ने इस बैठक को बहुत महत्वपूर्ण और फलदायी बताया। दोनों अधिकारियों ने क्षेत्रीय तनाव को खत्म करने के लिए सैन्य समाधानों को खारिज कर दिया।
बैठक के दौरान अरगची ने अमेरिकी एकतरफावाद का विरोध किया और कैस्पियन सागर में ईरानी और रूसी जहाजों पर हुए हमलों पर चिंता जताई। लावरोव अब ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन से भी मिलेंगे। इस मुलाकात में जनवरी 2025 में हस्ताक्षरित 20 साल के व्यापक रणनीतिक साझेदारी समझौते पर आगे की चर्चा होगी।
ईरान ने सात दिन के युद्धविराम और होर्मुज जलडमरूमध्य को चरणों में फिर से खोलने का प्रस्ताव रखा है। हालांकि, यह प्रस्ताव अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी और प्रतिबंधों को हटाने की शर्त पर आधारित है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है और चेतावनी दी है कि अगर तेहरान ने अपना व्यवहार नहीं बदला तो वॉशिंगटन जल्द ही काम खत्म कर सकता है।
क्षेत्रीय अस्थिरता इस समय चरम पर है। ब्रिटिश नौसेना ने पिछले एक हफ्ते में होर्मुज जलडमरूमध्य या उसके पास वाणिज्यिक जहाजों पर 10 हमलों की रिपोर्ट दी है। वहीं, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने एक नौसैनिक माइन के कारण तेल टैंकर में आग लगने की खबर दी है, जिसकी अभी पुष्टि नहीं हुई है। ईरानी अधिकारियों ने अमेरिकी ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर जवाबी हमले करने की धमकी भी दी है।
तेहरान आने से पहले लावरोव मनमा (बहरीन) में खाड़ी सहयोग परिषद की बैठक में शामिल हुए थे, जहां उन्होंने क्षेत्रीय देशों के बीच सीधे संवाद की वकालत की थी। इसी बीच ऐसी खबरें हैं कि रूसी विशेषज्ञ धीरे-धीरे ईरान के बुशेहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र में वापस लौट रहे हैं।