लेबनान में इजरायली सेना का बड़ा कब्जा, 60 से अधिक गांवों पर नियंत्रण

Sushma Kumari23 September 20262 min read6 viewsWorld
लेबनान में इजरायली सेना का बड़ा कब्जा, 60 से अधिक गांवों पर नियंत्रण

दक्षिणी लेबनान में इजरायली सेना ने 60 से भी अधिक गांवों पर कब्जा कर लिया है, जिससे वहां के विस्थापित निवासियों को दूर से अपने घरों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के विनाश को देखने पर मजबूर होना पड़ रहा है। अल जज़ीरा की संवाददाता ज़ीना खोद्रे ने 23 सितंबर, 2026 को बताया कि यह कार्रवाई एक बड़े "सुरक्षा बफर ज़ोन" का हिस्सा है, जो लेबनान के क्षेत्र में 10 किलोमीटर तक फैला हुआ है। इस स्थिति ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है।

यह सुरक्षा बफर ज़ोन, जिसे 'येलो लाइन' भी कहा जा रहा है, कुछ इलाकों में लगभग पाँच मील तक चौड़ा है। 22 सितंबर, 2026 तक, संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल लेबनान (UNIFIL) ने जानकारी दी कि इजरायली सैनिक इस ज़ोन के भीतर लगभग 30 सैन्य चौकियों से अपनी गतिविधियां चला रहे हैं, जिनमें आठ मजबूत किलेबंदी वाले ठिकाने भी शामिल हैं। NPR इलिनोइस ने 19 सितंबर, 2026 को पहले ही बताया था कि इजरायली सेना नागरिकों को इन क्षेत्रों में जाने से रोक रही है और वहां की इमारतों को गिरा रही है।

कूटनीतिक प्रयास और यूएन की भूमिका

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दिसंबर 2026 के अंत में UNIFIL का कार्यकाल समाप्त होने वाला है, और उससे पहले इस संकट को सुलझाने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज़ी से बढ़ रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान न्यूयॉर्क में, लेबनानी प्रधानमंत्री नवाफ सलाम और विदेश मंत्री जो राज्जी ने UNIFIL की जगह संयुक्त राष्ट्र के तहत एक अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति बनाए रखने की वकालत की। उनका मानना था कि ऐसा करने से शक्ति शून्य (power vacuum) की स्थिति नहीं बनेगी। प्रधानमंत्री सलाम ने इस बात पर जोर दिया कि राज्य के अधिकार को बहाल करने के लिए लेबनानी सेना का समर्थन करना बेहद ज़रूरी है।

लेबनानी राष्ट्रपति जोसेफ औन ने 18 सितंबर, 2026 को कहा कि इजरायल का लगातार कब्जा और हमले अमेरिका की मध्यस्थता से हुए एक फ्रेमवर्क समझौते को बाधित कर रहे हैं। फ्रांस ने 17 सितंबर को आधिकारिक तौर पर इस समझौते का स्वागत किया था और इसे लेबनान की संप्रभुता के लिए एक रोडमैप बताया था।

इजरायल और हिज़्बुल्लाह का रुख

वहीं, इजरायली नेतृत्व का रुख बेहद कड़ा है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने 15 जून, 2026 को कहा था कि सेनाएं तब तक वहां रहेंगी जब तक सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाती। रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने 24 जून, 2026 को यह भी स्पष्ट किया कि जब तक उत्तरी इजरायली शहरों की सुरक्षा की गारंटी नहीं दी जाती, तब तक कोई वापसी नहीं होगी। दूसरी ओर, हिज़्बुल्लाह ने मौजूदा लेबनान-इजरायल फ्रेमवर्क को सिरे से खारिज कर दिया है। हिज़्बुल्लाह ने पूर्ण युद्धविराम और इजरायली सेना की पूर्ण वापसी की मांग की है। यह घटनाक्रम दिखाता है कि इस क्षेत्र में शांति स्थापित करने के प्रयास कितने जटिल और चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं।

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