लेबनान सेना का बड़ा दावा, इसराइल ने जून समझौते का 7,7000 बार किया उल्लंघन.

लेबनान की सेना ने आधिकारिक तौर पर 9 सितंबर 2026 को यह बड़ा बयान दिया है कि इसराइल ने अमेरिका की मध्यस्थता से हुए जून समझौते का भारी उल्लंघन किया है। लेबनान के मुताबिक इसराइल ने पिछले कुछ महीनों में करीब 7,700 बार सीजफायर समझौते को तोड़ा है। इस समझौते पर दोनों पक्षों ने पिछले साल 26 जून 2026 को हस्ताक्षर किए थे जिसका मुख्य उद्देश्य इलाके में शांति बहाल करना था। लेबनान सेना का कहना है कि इसराइल की लगातार हो रही सैन्य कार्रवाई और गोलाबारी के कारण क्षेत्रीय स्थिरता लाने के सारे प्रयास बेकार हो रहे हैं। इस गंभीर स्थिति के बारे में अधिक जानकारी आप ReliefWeb रिपोर्ट में पढ़ सकते हैं।
जून समझौते की शर्तें और ज़मीनी हालात
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 26 जून 2026 को हुए इस समझौते के तहत हिजबुल्लाह का निरस्त्रीकरण किया जाना था और साथ ही इसराइली सेना को दक्षिण लेबनान से चरणबद्ध तरीके से पीछे हटना था। इस समझौते का मकसद लंबे समय से चल रहे संघर्ष को पूरी तरह समाप्त करना था। लेकिन लेबनान की सेना का ऐसा मानना है कि इसराइल की हरकतों की वजह से लेबनान की सशस्त्र सेना यानी LAF की साख देश और दुनिया दोनों जगह पर कमजोर हो रही है। इसराइल लगातार यह आरोप लगाता रहा है कि हिजबुल्लाह इस समझौते को नहीं मान रहा है और लगातार ड्रोन से हमले कर रहा है। इसके जवाब में लेबनान की सेना का कहना है कि वे अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी से निभा रहे हैं लेकिन इसराइली हमलों के कारण पुनर्निर्माण का काम रुक गया है और लोग अपने घरों को वापस नहीं लौट पा रहे हैं.
आम नागरिकों की मौत और मानवीय संकट
लेबनान के सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार, 5 सितंबर से 7 सितंबर 2026 के बीच हुई हिंसक झड़पों में 27 लोगों की मौत हो गई थी और करीब 69 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। इसराइल की तरफ से लगातार हवाई हमले, गोलाबारी, एयरस्पेस का उल्लंघन और इमारतों को गिराने का काम दक्षिण लेबनान में जारी है। इस बिगड़ते हालात को देखते हुए नॉर्वेजियन शरणार्थी परिषद ने चेतावनी दी है कि यह समझौता अब टूटने की कगार पर पहुंच गया है, जिसकी वजह से आम नागरिकों में भारी डर का माहौल है और लोग अपना घर छोड़कर भागने को मजबूर हो रहे हैं। लेबनान की सेना ने इसराइल की उन आलोचनाओं को भी सिरे से खारिज कर दिया है जिसमें सेना की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे थे। सेना का साफ कहना है कि इसराइली हमलों की वजह से ही शांति व्यवस्था बनाए रखने और हथियारों को हटाने के काम में बाधा आ रही है।