लेबनान में गहराया विस्थापन का संकट, इसराइली हमलों के छह महीने बाद लाखों लोग बेघर.

लेबनान में इसराइली सैन्य अभियानों को तेज हुए छह महीने से ज्यादा का समय बीत चुका है और वहां विस्थापन का संकट लगातार बहुत गंभीर होता जा रहा है। इस सैन्य अभियान में हुई भारी तबाही के कारण आम लोगों की मुश्किलें दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही हैं और लोग अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने को मजबूर हैं। 9 सितंबर 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, लेबनान में आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों यानी आईडीपी की संख्या बढ़कर 333,144 तक पहुंच गई है। इससे पहले 1 सितंबर को यह संख्या 329,240 दर्ज की गई थी, जो यह साफ बताती है कि संकट थमा नहीं है। हालांकि 19 अगस्त 2026 तक 856,316 लोग अपने इलाकों में वापस लौट चुके थे, लेकिन सैकड़ों हजार लोग आज भी अपने घरों के नष्ट होने, आजीविका छिन जाने और लगातार बनी हुई असुरक्षा के कारण लौटने में असमर्थ हैं। इस पूरी स्थिति के बारे में अधिक जानकारी ReliefWeb रिपोर्ट में दी गई है।
मानवीय हालात और हालिया घटनाएं
हाल के घटनाक्रमों ने वहां के मानवीय हालात को और अधिक पेचीदा बना दिया है। 13 सितंबर 2026 को इसराइली सेना ने टायर जिले के अल-Mansouri इलाके में भारी एयरस्ट्राइक्स, तोप से गोलाबारी और बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ की कार्रवाई की। लेबनान के राष्ट्रपति Joseph Aoun ने हाल ही में नबातिएह और ज़वततार अल-घारबिएह का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने कहा कि इसराइली सेना की वापसी, पकड़े गए लोगों और विस्थापित नागरिकों की घर वापसी तथा देश का पुनर्निर्माण सरकार का सबसे मुख्य उद्देश्य है। राष्ट्रपति ने यह भी बताया कि इस संघर्ष में अब तक 4,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और 10 लाख से अधिक लोग अपना घर छोड़कर जाने को मजबूर हुए हैं। उन्होंने यह बात भी साफ कर दी कि इस समय इस्राइल के साथ बातचीत की कोई योजना नहीं बनाई जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय चिंता और राहत कार्यों की चुनौतियां
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव António Guterres ने लगातार चल रहे इन सैन्य अभियानों पर गहरी चिंता जताई है। खासकर नबातिएह के आसपास के इलाकों को लेकर उन्होंने चिंता व्यक्त की है, जहां संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय यानी OCHA के अनुसार सितंबर के पहले हफ्ते में ही लगभग 20,000 लोग अपना घर छोड़कर भाग गए थे। गुटेरेस ने सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1701 के तहत तुरंत सैन्य गतिविधियां रोकने और इसराइली सैनिकों के पीछे हटने की औपचारिक अपील की है, जिसकी पूरी जानकारी Mobility Report में दी गई है। इस बीच, इंटरनेशनल कमेटी ऑफ द रेड क्रॉस यानी ICRC टूटी हुई स्वास्थ्य सेवाओं को ठीक करने और जरूरी सामान पहुंचाने के लिए अपने काम को तेजी से आगे बढ़ा रहा है।
राहत कार्यों के सामने इस समय बहुत बड़ी रुकावटें आ रही हैं, जिनमें फंड की भारी कमी सबसे ऊपर है। यूएनएचसीआर का लेबनान में चल रहा राहत अभियान साल 2026 के लिए केवल 24 प्रतिशत ही फंड प्राप्त कर पाया है, जैसा कि IOM Lebanon Crisis की रिपोर्ट में बताया गया है। इसके अलावा, मार्च और मई 2026 के बीच स्वास्थ्य कर्मियों और अस्पतालों पर हमलों की कुल 190 घटनाएं दर्ज की गईं। इन हमलों में 128 लोगों की जान चली गई और 332 लोग घायल हो गए, जिससे वहां का स्वास्थ्य ढांचा पूरी तरह चरमरा गया है।