लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन पहुंचे दक्षिण लेबनान के औचक दौरे पर, इजराइली वापसी का जताया भरोसा

लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने देश के दक्षिणी हिस्से से इजराइली सैनिकों की वापसी सुनिश्चित करने और युद्ध से प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्निर्माण का बड़ा संकल्प जताया है। उन्होंने शनिवार को दक्षिण लेबनान का अचानक दौरा किया और वहां के स्थानीय लोगों के साथ-साथ सुरक्षाबलों से मुलाकात की। राष्ट्रपति के इस अचानक दौरे से पूरे इलाके में हलचल मच गई और लोगों को संकट के समय में एक बड़ा प्रशासनिक समर्थन मिला।
बिना पूर्व सूचना के पहुंचे नबातियेह शहर
लेबनानी सरकारी मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति औन बिना किसी पूर्व सूचना के सीधे नबातियेह शहर पहुंच गए थे। उनके साथ देश के सेना प्रमुख रोडोल्फ हायकल समेत कई वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी भी मौजूद रहे। इस दौरे के दौरान राष्ट्रपति ने स्थानीय नागरिकों के साथ पूरी एकजुटता दिखाई। उन्होंने नबातियेह सरकारी अस्पताल के सभी कर्मचारियों की जमकर सराहना की और कहा कि इस मुश्किल वक्त में चिकित्साकर्मी अपनी जान जोखिम में डालकर लगातार अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जबकि क्षेत्र में लोगों की संख्या काफी कम हो चुकी है।
राष्ट्रीय प्राथमिकताएं हैं वापसी और पुनर्निर्माण
राष्ट्रपति कार्यालय की तरफ से दी गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, राष्ट्रपति औन ने स्पष्ट किया कि इजराइली सेना की पूर्ण वापसी, सभी बंदियों और विस्थापित लोगों की सुरक्षित घर वापसी तथा युद्ध से तबाह हुए सभी प्रभावित क्षेत्रों का पुनर्निर्माण इस समय लेबनानी राज्य की सबसे बड़ी राष्ट्रीय प्राथमिकताएं हैं। सरकार इन सभी मुद्दों पर बहुत गंभीरता से काम कर रही है ताकि आम जनता को राहत पहुंचाई जा सके।
सैन्य तैनाती और ठिकानों का लिया जायजा
इसके बाद राष्ट्रपति औन जावतर अल-घरबिया पहुंचे, जिसे इजराइल के साथ आपसी सहमति से तय किए गए शुरुआती वापसी क्षेत्रों में से एक माना जाता है। वहां पहुंचकर उन्होंने लेबनानी सेना की नई तैनाती का बारीकी से निरीक्षण किया और आसपास मौजूद इजराइली सैन्य ठिकानों का भी पूरा जायजा लिया। हिज्बुल्लाह की तरफ से इजराइल पर हमले किए जाने और उसके बाद क्षेत्र में इजराइली हवाई तथा जमीनी सैन्य कार्रवाई शुरू होने के बाद से दक्षिण लेबनान का यह राष्ट्रपति का पहला दौरा है। इस बीच, अमेरिका की मध्यस्थता से इजराइल और लेबनान के बीच प्रस्तावित वार्ता का नया दौर, जो असल में अगले सप्ताह होना था, उसे अब आगे बढ़ाकर अक्टूबर महीने तक टाल दिया गया है।