लेबनान के राष्ट्रपति ने अमरीका का किया शुक्रिया, इसराइल की हिरासत से रिहा हुए पांच कैदी.

लेबनान के राष्ट्रपति Joseph Aoun ने अमरीका और अंतरराष्ट्रीय संगठनों का दिल से शुक्रिया अदा किया है। इसराइल की हिरासत से पांच लेबनानी कैदियों की रिहाई के बाद यह बयान सामने आया है। इस पूरी रिहाई की प्रक्रिया को पूरा करने में अंतरराष्ट्रीय और कूटनीतिक स्तर पर काफी बातचीत हुई थी, जिसके बाद आखिरकार इन कैदियों को उनके वतन वापस लौटने का मौका मिला है।
नाकुरा बॉर्डर क्रॉसिंग पर हुआ कैदियों का ट्रांसफर
यह पूरी रिहाई और कैदियों की अदला-बदली का काम Friday, September 4, 2026 को पूरा हुआ। इस दिन आखिरी चार लोगों को ट्रांसफर किया गया, जबकि पहले कैदी को उससे एक दिन पहले यानी Thursday, September 3, 2026 को ही रिहा कर दिया गया था। यह पूरी प्रक्रिया Naqoura border crossing पर पूरी की गई। इस संवेदनशील काम को निष्पक्ष तरीके से अंजाम देने के लिए International Committee of the Red Cross (ICRC) ने एक न्यूट्रल बिचौलिये की भूमिका निभाई और सभी औपचारिकताएं पूरी कराईं।
राष्ट्रपति आउन ने अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रयासों को सराहा
लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन ने खास तौर पर अमरीका के नेतृत्व, खासकर राष्ट्रपति Donald Trump के प्रशासन के कामों की तारीफ की। उन्होंने कहा कि इन लोगों की सुरक्षित रिहाई इस बात को पक्का करती है कि लेबनान की कूटनीति सही दिशा में काम कर रही है। इसके साथ ही उन्होंने देश की पूरी संप्रभुता को बहाल करने के लिए त्रिपक्षीय ढांचे की शर्तों को पूरा करने की बात पर जोर दिया। जिन लोगों को इस बार रिहाई मिली है, उनमें दो लेबनानी नागरिक Hussein Abdallah Ayache और Ali Hassan Shour शामिल हैं। इसके अलावा दो सीरियाई नागरिक Assaad Mahmoud Haske और Sam Ibrahim al-Samad भी रिहा किए गए हैं। वहीं, पहले दिन रिहा होने वाले व्यक्ति का नाम Malek Ghazi था, जिन्हें गुरुवार को लेबनानी सेना को सौंप दिया गया था।
इसराइल का आधिकारिक बयान और आपसी समझौता
प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu के कार्यालय से जारी किए गए आधिकारिक बयान में यह साफ किया गया कि इसराइल इन पांचों कैदियों को छोड़ने के लिए इसलिए राजी हुआ क्योंकि जांच में यह बात सामने आई थी कि ये सभी आम नागरिक थे। इन लोगों का आतंकवाद से कोई लेना-देना नहीं था और न ही ये किसी आतंकवादी संगठन से जुड़े हुए थे। इस पूरी डील के बदले में लेबनान ने भी एक बड़ा कदम उठाया है। लेबनान उन यहूदी समुदाय के नेताओं के अवशेषों का पता लगाने में मदद कर रहा है, जिन्हें 1980s के लेबनानी गृहयुद्ध के दौरान अगवा कर लिया गया था और बाद में जिनकी हत्या कर दी गई थी। इस बारे में अधिक जानकारी इसराइल सरकार के आधिकारिक पेज और कतर न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट में दी गई है।
रेड क्रॉस की अपील और अमरीकी रुख
भले ही आईसीआरसी ने इस ट्रांसफर में मदद की, लेकिन संगठन ने यह भी साफ किया कि October 2023 के बाद से उन्हें इसराइल में बंद अन्य कैदियों से मिलने की इजाजत नहीं मिली है। इसी वजह से आईसीआरसी ने एक बार फिर अपील की है कि उन्हें बाकी सभी कैदियों से मिलने का मौका दिया जाए। दूसरी ओर, अमरीकी विदेश विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि इस बातचीत को अमरीका ने ही मध्यस्थता करक तय कराया था। अमरीका को उम्मीद है कि यह घटनाक्रम आगे चलकर पूरे इलाके में शांति और बड़ी चर्चाओं के लिए एक मजबूत नींव का काम करेगा।