लेबनान के स्पीकर नबीह बेरी ने की मांग, संयुक्त राष्ट्र शांति सेना के हटने से पहले चाहिए नया अंतरराष्ट्रीय विकल्प.

लेबनान की संसद के स्पीकर नबीह बेरी ने दक्षिण लेबनान में सुरक्षा हालात को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने 29 अगस्त 2026 को साफ कहा कि अमेरिका द्वारा संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल यानी UNIFIL के कार्यकाल को आगे बढ़ाने से इनकार करने के बाद, अब एक नए अंतरराष्ट्रीय विकल्प की तुरंत तलाश करनी होगी। बेरी ने जोर देकर कहा कि कोई भी नई सेना संयुक्त राष्ट्र के झंडे के तहत ही काम करे और लेबनानी सेना को मजबूत करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाए।
लेबनान में सुरक्षा संकट और राजनीतिक हलचल
स्पीकर नबीह बेरी ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते कोई ठोस व्यवस्था नहीं बनी, तो क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय दखल का कानूनी आधार कमजोर हो जाएगा। उन्होंने इस बात को भी खारिज कर दिया कि लेबनान और इस्रायल के बीच कोई द्विपक्षीय समझौता इस अंतरराष्ट्रीय मौजूदगी की जगह ले सकता है। इसके अलावा, उन्होंने बताया कि इस्रायल लगातार अमेरिकी मध्यस्थता वाले फ्रेमवर्क समझौते के परिणामों को मानने से इनकार कर रहा है। लेबनान इस बात को लेकर बेहद चिंतित है कि यदि बिना किसी पुख्ता अंतरराष्ट्रीय विकल्प के मौजूदा मिशन समाप्त हो गया, तो देश में एक बड़ा सुरक्षा खालीपन पैदा हो सकता है।
संसद और राष्ट्रपति का रुख
इस मिशन को जारी रखने के लिए लेबनान के भीतर से भी लगातार आवाजें उठ रही हैं। इससे पहले 28 अगस्त 2026 को यह जानकारी सामने आई थी कि लेबनान के कुल 128 में से 86 सांसदों ने एक याचिका पर हस्ताक्षर किए थे। इस याचिका का समर्थन राष्ट्रपति जोसफ आऊं और स्पीकर नबीह बेरी दोनों ने किया था, ताकि देश में UNIFIL की मौजूदगी बनी रहे। इससे पहले 17 अगस्त 2026 को राष्ट्रपति जोसफ आऊं ने भी सार्वजनिक रूप से अपील की थी कि UNIFIL के कार्यकाल को बढ़ाया जाए या फिर मौजूदा कार्यकाल खत्म होने से पहले तुरंत कोई नया कानूनी ढांचा तैयार किया जाए ताकि अंतरराष्ट्रीय सैन्य मौजूदगी बनी रहे।
यूरोपीय देशों का रुख
मौजूदा स्थिति अभी भी बेहद गंभीर बनी हुई है। हालांकि फ्रांस, स्पेन और इटली जैसे कई देशों ने यह संकेत दिए हैं कि वे लेबनान में अपनी सेना बनाए रखने के लिए तैयार हैं, लेकिन इसके लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा एक नया प्रस्ताव पारित किया जाना जरूरी है। लेबनान सरकार और आम नागरिकों की नजरें अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय के अगले कदमों पर टिकी हैं ताकि देश में शांति और स्थिरता बरकरार रखी जा सके।