ईरान हमले की योजना पर सेना से टकराव के बाद नेतन्याहू के खिलाफ आपराधिक जांच की मांग
इजरायल के नेता अविगडोर लिबरमैन ने पीएम नेतन्याहू पर देशद्रोह का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ आपराधिक जांच की मांग की है।

यरूशलेम: इजरायल के नेता और यिसराएल बेतेनु के अध्यक्ष अविगडोर लिबरमैन ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ आपराधिक जांच शुरू करने की मांग की है। लिबरमैन ने इस संबंध में इजरायल के अटॉर्नी जनरल को पत्र लिखा है और नेतन्याहू पर देशद्रोह का आरोप लगाया है।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब स्थानीय मीडिया में खबरें आईं कि नेतन्याहू और इजरायल रक्षा बल (IDF) के चीफ ऑफ स्टाफ के बीच ईरान पर सैन्य कार्रवाई को लेकर मतभेद हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, चीफ ऑफ स्टाफ जनरल एयाल ज़मीर ने नेतन्याहू के उन सुझावों से सहमति जताने से इनकार कर दिया था, जो ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई से जुड़े थे।
लिबरमैन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि प्रधानमंत्री पिछले एक महीने से सुरक्षा प्रतिष्ठान के प्रमुखों पर ऐसे कदम उठाने का दबाव बना रहे हैं, जिससे ईरान के साथ गलतफहमी पैदा हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव से ठीक पहले इजरायल को युद्ध में झोंकने की कोशिश और केवल चुनाव हारने के डर से सैनिकों की जान जोखिम में डालना देश और उसकी सुरक्षा के साथ गद्दारी है।
इजरायल के चैनल 12 ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि नेतन्याहू और जनरल एयाल ज़मीर के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है। सूत्रों के हवाले से खबर दी गई कि ज़मीर सैन्य कार्रवाई को रोकने की कोशिश कर रहे थे और उन्होंने इस संबंध में अधिक विचार-विमर्श और नेतन्याहू से कानूनी अनुमति के हस्ताक्षरित दस्तावेज मांगे थे। सैन्य सूत्रों ने आशंका जताई कि राजनीतिक नेतृत्व ईरान के मुद्दे का इस्तेमाल अपने राजनीतिक फायदे के लिए करना चाहता है।
दूसरी ओर, बेंजामिन नेतन्याहू ने चैनल 14 को दिए एक इंटरव्यू में इन सभी आरोपों को बकवास बताया है। हालांकि, उन्होंने एक अन्य टीवी कार्यक्रम में यह बात स्वीकार की कि उन्होंने IDF और मोसाद को ईरानी शासन को उखाड़ फेंकने के लिए काम करने का निर्देश दिया है।
प्रधानमंत्री पद के दावेदार गादी आइज़ेनकोट ने भी इस टकराव की आलोचना की है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि इजरायल की सुरक्षा कोई राजनीतिक सौदेबाजी का जरिया नहीं है और सैनिकों की जान दांव पर नहीं लगाई जा सकती। आइज़ेनकोट ने कहा कि वह चीफ ऑफ स्टाफ एयाल ज़मीर और IDF कमांडरों पर पूरा भरोसा करते हैं और सेना को नेतन्याहू के सत्ता बचाने के अभियान का हथियार नहीं बनने देंगे।
यह पूरा विवाद मंगलवार को होने वाले महत्वपूर्ण चुनाव से ठीक 24 घंटे पहले सामने आया है। ओपिनियन पोल के मुताबिक गादी आइज़ेनकोट के गठबंधन को मामूली बढ़त हासिल है, लेकिन फिलहाल कोई भी गठबंधन सरकार बनाने की स्थिति में नहीं दिख रहा है।