फ्रांस में बढ़ती महंगाई के लिए राष्ट्रपति मैक्रोन ने अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष को ठहराया जिम्मेदार
राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रोन ने फ्रांस में बढ़ती महंगाई और ऊर्जा कीमतों के लिए अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे सैन्य संघर्ष को जिम्मेदार ठहराया है।

पेरिस: फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रोन ने देश में बढ़ती महंगाई और ऊर्जा की आसमान छूती कीमतों के लिए अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष को जिम्मेदार बताया है। हाल ही में दिए गए इंटरव्यू में मैक्रोन ने कहा कि 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के नाम से चल रहे अमेरिकी युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी की वजह से फ्रांस में लोगों की खरीदने की क्षमता पर बुरा असर पड़ा है।
राष्ट्रपति मैक्रोन ने साफ किया कि देश में चल रही सामाजिक अस्थिरता के पीछे आंतरिक नीतिगत सुधार नहीं, बल्कि बाहरी भू-राजनीतिक कारण हैं। ईंधन और गैस की आपूर्ति सुरक्षित करने के लिए फ्रांस अब अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक प्रयास कर रहा है, जिसके तहत जल्द ही खाड़ी देशों का दौरा किया जाएगा।
यह सैन्य संघर्ष 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था, जिसमें अमेरिका और इजरायल संयुक्त रूप से ऑपरेशन चला रहे हैं। पेंटागन ने 29 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस को सूचित किया कि 16 अक्टूबर तक ईरान के खिलाफ इस अभियान की लागत कम से कम 47.1 अरब डॉलर तक पहुंच गई है।
दूसरी ओर, अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनावों के बाद सैन्य तनाव और बढ़ने की आशंका है, जिसे लेकर अमेरिकी अधिकारियों ने क्षेत्रीय सहयोगियों को आगाह किया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बुधवार को कहा कि तेहरान अभी भी कूटनीतिक प्रयासों की गुंजाइश रख रहा है, हालांकि ईरानी नेताओं ने अपनी जवाबी रणनीति में 'जीरो रेड लाइन्स' की धमकी दी है।
यूएई के विदेश मंत्रालय ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए तुरंत तनाव कम करने और राजनीतिक समाधान निकालने की अपील की है। वहीं, राष्ट्रपति मैक्रोन की टिप्पणियों पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने सार्वजनिक रूप से आलोचना की है। इंटेलब्रीफ की रिपोर्ट के मुताबिक, वॉशिंगटन सैन्य कार्रवाई को और तेज करने की तैयारी कर रहा है।