मदीना पावर स्टेशन पर ड्रोन हमला, ओआईसी और अरब देशों ने की कड़ी निंदा

Gautam Sahu2 October 20262 min read0 viewsSaudi
मदीना पावर स्टेशन पर ड्रोन हमला, ओआईसी और अरब देशों ने की कड़ी निंदा

सऊदी अरब के पवित्र शहर मदीना में स्थित एक पावर स्टेशन को निशाना बनाकर किए गए ड्रोन हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है। इस कायरतापूर्ण हमले के बाद इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) और कई प्रमुख अरब देशों ने खुलकर इसकी निंदा की है। सऊदी के नेतृत्व वाले गठबंधन ने इस हमले के पीछे यमन के हूती विद्रोहियों का हाथ होने का दावा किया है।

तैयाबा बिजली वितरण स्टेशन को बनाया गया निशाना

यह हमला मदीना के तैयबा बिजली वितरण स्टेशन पर हुआ, जो पैगंबर की मस्जिद को बिजली की आपूर्ति करता है। गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी के अनुसार, यह घटना मंगलवार तड़के हुई। हमले की वजह से एक ट्रांसफॉर्मर जरूर सेवा से बाहर हो गया, लेकिन राहत की बात यह रही कि व्यापक बिजली ग्रिड पर इसका कोई असर नहीं पड़ा और आपूर्ति सुचारू बनी रही।

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  • OIC की कड़ी प्रतिक्रिया: संगठन के सचिवालय ने इस घटना को एक खतरनाक वृद्धि और पवित्र स्थलों की गरिमा का खुला उल्लंघन करार दिया है।
  • संयुक्त अरब अमीरात (UAE): यूएई ने इस ड्रोन हमले को सऊदी संप्रभुता का घोर उल्लंघन और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बताया है।
  • जॉर्डन और कुवैत: जॉर्डन ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताते हुए सऊदी अरब के साथ पूर्ण एकजुटता व्यक्त की है। वहीं, कुवैत ने कहा कि पैगंबर की मस्जिद की सेवा करने वाली सुविधा पर हमला दुनिया भर के मुसलमानों की भावनाओं को आहत करता है।
  • बहराइच और अन्य देश: बहरीन ने ईरान समर्थित हूतियों के इन लगातार हमलों की निंदा करते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से सख्त कदम उठाने की मांग की है।

सुरक्षा और जांच जारी

गठबंधन का कहना है कि उनके पास इस बात के पुख्ता सबूत हैं। ऑपरेशनल डेटा, मलबे के विश्लेषण और जांच के अन्य निष्कर्षों से यह साबित हो गया है कि इस हमले की योजना बनाने और इसे अंजाम देने में हूती मिलिशिया का ही हाथ था। हालांकि, इन तमाम आरोपों पर अभी तक हूती समूह की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के हमले न केवल नागरिक बुनियादी ढांचों को नुकसान पहुंचाते हैं बल्कि पूरे क्षेत्र में शांति प्रयासों को भी कमजोर करते हैं। सऊदी अरब और उसके सहयोगी देश इस प्रकार के सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहे हैं।

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