मदीना पावर स्टेशन पर ड्रोन हमला, ओआईसी और अरब देशों ने की कड़ी निंदा

पवित्र शहर मदीना में स्थित एक बिजली वितरण केंद्र को निशाना बनाकर किए गए ड्रोन हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) और कई प्रमुख अरब देशों ने इस कायराना हरकत की पुरजोर निंदा की है। इस हमले ने एक बार फिर क्षेत्रीय सुरक्षा और धार्मिक स्थलों की पवित्रता को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, यह हमला तायबा बिजली वितरण स्टेशन पर हुआ, जो पैगंबर की मस्जिद को सेवाएं प्रदान करता है। सऊदी के नेतृत्व वाले गठबंधन ने इस हमले के पीछे यमन में सक्रिय हूती विद्रोहियों का हाथ बताया है। गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी ने जानकारी दी कि मंगलवार तड़के हुए इस हमले के कारण बिजली का एक ट्रांसफार्मर अस्थायी रूप से बंद हो गया था, हालांकि मुख्य ग्रिड सुचारू रूप से काम करता रहा। मलबे और अन्य सबूतों की जांच के बाद यह स्पष्ट हुआ कि इस हमले की योजना हूती गुट द्वारा बनाई गई थी।
घटना के सामने आने के तुरंत बाद ओआईसी सचिवालय ने इसे एक खतरनाक escalation (बढ़ोतरी) करार दिया और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताया। संगठन ने सऊदी अरब की सुरक्षा और उसके पवित्र स्थलों की रक्षा के प्रयासों के प्रति अपनी पूरी एकजुटता व्यक्त की है।
यूएई, जॉर्डन, कुवैत और बहरीन सहित कई देशों ने इस हमले की कड़ी शब्दों में भर्त्सना की है। यूएई ने इसे सऊदी संप्रभुता का खुला उल्लंघन बताया, वहीं कुवैत ने कहा कि यह हमला दुनिया भर के मुसलमानों की भावनाओं को आहत करता है। बहरीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से हूती मिलिशिया के खिलाफ सख्त रुख अपनाने और प्रासंगिक प्रस्तावों को सख्ती से लागू करने की अपील की है।
फिलहाल हूती विद्रोहियों की ओर से इस मामले में कोई तत्काल प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इससे पहले भी सितंबर में मक्का के दक्षिण में एक ड्रोन को मार गिराए जाने की घटना सामने आई थी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि नागरिक बुनियादी ढांचे और पवित्र स्थलों को निशाना बनाने के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं।