महात्मा गांधी का शांति और अहिंसा का संदेश आज के दौर में सबसे ज्यादा प्रासंगिक
Indian Ambassador to Kazakhstan highlights Mahatma Gandhi's message of peace and non-violence at an Astana event marking his birth anniversary.

आज की दुनिया में जब चारों तरफ भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और संघर्षों का दौर चल रहा है, तब अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी के विचार और भी अधिक महत्वपूर्ण हो गए हैं। कज़ाकिस्तान की राजधानी अस्ताना में महात्मा गांधी की 157वीं जयंती और अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के अवसर पर आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान यह बात खुलकर सामने आई। इस कार्यक्रम में विभिन्न देशों के राजनयिकों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुखों ने हिस्सा लिया और बापू के दिखाए मार्ग को याद किया।
अस्ताना में हुआ विशेष आयोजन
कज़ाकिस्तान में भारत के राजदूत वाई.के. सैलास थंगल ने इस गरिमामयी समारोह की अगुवाई की। उन्होंने महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए कहा कि आज के समय में जब दुनिया के कई हिस्सों में अशांति का माहौल है, तब गांधीजी का शांति और अहिंसा का संदेश पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक है। राजदूत ने इस बात पर जोर दिया कि अहिंसा को कमजोरी नहीं बल्कि ताकत और साहस का प्रतीक मानने का गांधीजी का विचार आज की पीढ़ियों के लिए एक बड़ी सीख है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया
इस कार्यक्रम में कज़ाकिस्तान में एस्टोनिया की राजदूत मार्जे लुप ने भी शिरकत की। उन्होंने मौजूदा वैश्विक परिदृश्य का हवाला देते हुए कहा कि वर्तमान भू-राजनीतिक तनावों के बीच अहिंसा दिवस मनाना बेहद जरूरी है, ताकि हम उस शांति की ओर ध्यान केंद्रित कर सकें जिसके लिए हमें प्रयास करना चाहिए। इसके अलावा, कज़ाकिस्तान में अपोस्टोलिक नन्सियो आर्कबिशप जॉर्ज पनामथुंडिल ने भी अपने विचार साझा करते हुए कहा कि गांधीजी के विचार अशांत और शांत, दोनों ही समयों में मार्गदर्शन का काम करते हैं और शांति का अर्थ केवल हिंसा का अभाव नहीं, बल्कि न्याय की उपस्थिति है।
द्विपक्षीय संबंधों का प्रतीक स्थल
अस्ताना में स्थापित महात्मा गांधी की यह आदमकद प्रतिमा भारत और कज़ाकिस्तान के बीच गहरे द्विपक्षीय संबंधों और मित्रता का जीवंत प्रतीक है। यह स्थान अक्सर सांस्कृतिक आदान-प्रदान और कूटनीतिक मुलाकातों का केंद्र बना रहता है, जो दोनों देशों की आपसी सद्भावना को और मजबूत करता है।