Saudi Arabia पर ड्रोन हमला नाकाम, मक्का और मदीना के इमामों ने हुती विद्रोहियों की कड़ी निंदा की.

सऊदी अरब की पवित्र भूमि मक्का और मदीना को निशाना बनाने की कोशिश करने वाले हुती विद्रोहियों के खिलाफ लोगों में भारी गुस्सा देखने को मिल रहा है। शुक्रवार को जुमे की नमाज के दौरान मक्का की ग्रैंड मस्जिद और मदीना की पैगंबर मस्जिद के इमामों ने इस खतरनाक हमले की खुलकर निंदा की और इसे एक बहुत बड़ा जुर्म करार दिया। अधिकारियों के अनुसार, यह हमला धार्मिक और मानवीय दोनों तरह के नियमों के खिलाफ है जिसे किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जा सकता है।
मक्का और मदीना के सुरक्षा पर कड़ा बयान
ग्रैंड मस्जिद के इमाम और उपदेशक शेख बंदर बालीलह ने शुक्रवार के अपने संबोधन के दौरान साफ शब्दों में कहा कि पवित्र स्थलों की सुरक्षा और देश में रहने वाले आम लोगों की जान हमारे लिए एक लाल लकीर यानी रेड लाइन है। उन्होंने आगे बताया कि जो लोग मुसलमानों में डर पैदा करना चाहते हैं और पवित्र स्थानों को नुकसान पहुंचाना चाहते हैं, वे असल में इस्लाम की शिक्षाओं के खिलाफ काम कर रहे हैं। हुती संगठन धर्म के नाम पर केवल तबाही मचाने का काम कर रहा है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि सऊदी अरब ऐसे हर बुरे इरादे का डटकर मुकाबला करने के लिए पूरी तरह सक्षम है और देश की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
दूसरी तरफ, मदीना स्थित पैगंबर मस्जिद के शेख अब्दुलमोहसेन अल-कासिम ने इस घटना पर बात करते हुए कहा कि मक्का और मदीना पर बार-बार हमले की कोशिश करना एक पुराना सिलसिला बन गया है। इस तरह की हरकतों का मकसद सिर्फ शांति से रहने वाले लोगों को डराना और बेकसूर मुसलमानों का खून बहाना है।
इस तरह नाकाम हुआ था हमला
यह पूरा मामला मंगलवार शाम का है जब सऊदी अरब की एयर डिफेंस टीम ने मक्का के दक्षिण में हुती विद्रोहियों द्वारा भेजे गए एक खतरनाक ड्रोन को हवा में ही रोककर तबाह कर दिया। इस कार्रवाई की वजह से वह ड्रोन मक्का के प्रतिबंधित क्षेत्र में दाखिल नहीं हो पाया। Coalition to Support Legitimacy in Yemen की रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना 15 सितंबर को शाम 6:50 बजे हुई थी। गठबंधन ने यह भी जानकारी दी कि मक्का को निशाना बनाने की हुती की यह दूसरी कोशिश थी। इससे पहले जुलाई 2017 में भी एक बैलिस्टिक मिसाइल दागने की कोशिश की गई थी जिसे सुरक्षा बलों ने पहले ही विफल कर दिया था।