मलेशिया में म्यांमार के नागरिकों की वापसी का ऐलान, 29 सितंबर को होगी पहली खेप रवाना.

Praggya Singh sabal28 August 20262 min read65 viewsWorld
मलेशिया में म्यांमार के नागरिकों की वापसी का ऐलान, 29 सितंबर को होगी पहली खेप रवाना.

मलेशिया के गृह मंत्रालय ने म्यांमार के नागरिकों की स्वैच्छिक वापसी कार्यक्रम के पहले चरण की पूरी तैयारी कर ली है। अधिकारियों ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि कुल 1,476 म्यांमार नागरिकों को उनके गृह देश वापस भेजने की तारीख 29 सितंबर 2026 तय की गई है। इस पूरी प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए म्यांमार नौसेना के दो युद्धपोतों और एक अस्पताल जहाज का इस्तेमाल किया जाएगा। पहले यह तारीख 28 अगस्त तय की गई थी, लेकिन एक समन्वय बैठक के बाद इसमें बदलाव किया गया।

राजनयिक नोट के जरिए हुई पहचान

वापस भेजे जाने वाले इन सभी लोगों की पहचान म्यांमार सरकार द्वारा 13 अगस्त को जारी किए गए एक राजनयिक नोट के माध्यम से की गई थी। हालांकि इससे पहले प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने कहा था कि म्यांमार 5,000 जातीय रोहिंग्या शरणार्थियों को वापस लेने के लिए तैयार हो गया है, लेकिन बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन लोगों को जान का खतरा या उत्पीड़न का डर होगा, उन्हें वापस नहीं भेजा जाएगा। संचार मंत्री फहमी फाजिल ने भी इस बात को दोहराते हुए कहा कि मलेशिया शरणार्थियों की सुरक्षा को सबसे पहले प्राथमिकता देगा।

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इमिग्रेशन डिपो में रखे गए हैं नागरिक

आंकड़ों के मुताबिक 15 अगस्त तक मलेशिया के इमिग्रेशन डिटेंशन डिपो में कुल 10,388 म्यांमार नागरिक मौजूद हैं। इमिग्रेशन विभाग और पुलिस मिलकर इन सभी लोगों की पहचान और उनके बैकग्राउंड की जांच करने में जुटे हुए हैं। आपको बता दें कि मलेशिया ने 1951 के शरणार्थी सम्मेलन या उसके 1967 के प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। इसके बावजूद देश का शरणार्थी पंजीकरण दस्तावेज कार्यक्रम राष्ट्रीय संप्रभुता और मानवीय प्रयासों के बीच संतुलन बनाने का दावा करता है।

अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की चिंताएं

मलेशिया सरकार के इस कदम की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ी आलोचना हो रही है। ह्यूमन राइट्स वॉच (HRW) ने मलेशियाई सरकार से इस प्रक्रिया को तुरंत रोकने की अपील की है। संस्था की एशिया मामलों की उप निदेशक ब्रायوني लाउ का कहना है कि म्यांमार में चल रहे गृहयुद्ध और सैन्य नियंत्रण के कारण अभी किसी को भी सुरक्षित वापस भेजना संभव नहीं है। इसके अलावा, अमेरिकी आयोग ने भी औपचारिक रूप से मलेशियाई सरकार से अनुरोध किया है कि रोहिंग्या नागरिकों को उनके सताने वालों के पास वापस न भेजा जाए। स्थानीय मानवाधिकार समूहों और अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों ने भी चेतावनी दी है कि रखाइन राज्य में रोहिंग्या आबादी के लिए हालात अभी भी बेहद खतरनाक बने हुए हैं। इस पूरी खबर की विस्तृत जानकारी आप USCIRF की आधिकारिक वेबसाइट पर देख सकते हैं।

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