Mansouri में इसराइली हवाई हमला और बुलडोज़र से घरों को गिराया, लेबनान में फिर भड़की हिंसा.

दक्षिण लेबनान के तटीय शहर Mansouri में मंगलवार, 1 सितंबर 2026 को सैन्य गतिविधियों में भारी तेजी देखने को मिली। इसराइली सेना द्वारा किए गए सिलसिलेवार हवाई हमलों, तोपखाने की गोलीबारी और बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ के अभियानों के कारण पूरा शहर एक जोरदार धमाके से दहल गया। लेबनान की सरकारी समाचार एजेंसी National News Agency (NNA) से मिली रिपोर्ट के अनुसार, इसराइली विमानों ने Mansouri के आसपास के इलाकों में ताबड़तोड़ हमले किए और तोप से गोले दागे। इस दौरान इसराइली सैनिक बुलडोज़र लेकर शहर के भीतर तक आगे बढ़ते नजर आए और al-Rabeh इलाके में खासतौर पर घरों को पूरी तरह तबाह कर दिया।
लेबनान के कई शहरों में सुनाई दी धमाकों की गूंज
लेबनान के अन्य दक्षिणी कस्बों में भी इसी तरह के बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ के अभियान चलाए जाने की खबरें सामने आई हैं। दिन के शुरुआती घंटों के दौरान Sour, Nabatieh और Marjayoun तक के दूरदराज इलाकों में भी तेज धमाकों की आवाजें साफ सुनी गईं। इसराइली सेना की तरफ से यह सैन्य कार्रवाई Israel Defense Forces (IDF) द्वारा जारी की गई एक जरूरी निकासी चेतावनी के बाद शुरू हुई। इस चेतावनी में हिजबुल्लाह पर संघर्ष विराम के उल्लंघन का आरोप लगाया गया था और इसी बात को इलाके में सैन्य कार्रवाई का आधार बनाया गया था।
इलाके के स्थानीय रहवासियों को युद्ध क्षेत्र से सुरक्षित दूरी बनाने के निर्देश दिए गए थे और उन्हें शहर से कम से कम एक किलोमीटर उत्तर की तरफ जाने को कहा गया था। हालांकि मंगलवार को Mansouri में हुई खास गोलाबारी के संबंध में IDF की तरफ से तुरंत कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था। लेकिन यह ताजा सैन्य अभियान ठीक उस समय सामने आया है जब हिजबुल्लाह ने अमरीका और इसराइल की तरफ से हथियार डालने की मांग को सार्वजनिक रूप से मानने से साफ इनकार कर दिया था।
शरणार्थियों के सामने खड़ी हुई बड़ी मानवीय समस्या
इस अचानक भड़की नए दौर की हिंसा के कारण अपने घरों से बेघर हुए लोगों के बीच भारी डर और चिंता का माहौल पैदा हो गया है। इनमें से कई ऐसे परिवार थे जो पिछले संघर्ष विराम के बाद अपने घरों में वापस लौट आए थे, लेकिन हालात बिगड़ने के बाद उन्हें एक बार फिर अपना घर-बार छोड़कर भागने के लिए मजबूर होना पड़ा। Mansouri और आसपास के पड़ोसी गांवों के हजारों लोग अभी भी अपने घरों से दूर विस्थापित जीवन जीने को मजबूर हैं। ये सभी लोग फिलहाल टायर (Tyre) के अलग-अलग सरकारी स्कूलों में शरण लेकर रहने को विछ्छल हैं।
इस पूरे मानवीय संकट को और ज्यादा गंभीर बनाने का काम आने वाली 15 सितंबर की स्कूल खुलने की तारीख कर रही है, क्योंकि स्कूलों के फिर से शुरू होने से इन अस्थायी ठिकानों पर रह रहे परिवारों के सिर से छत छिनने का खतरा पैदा हो गया है। लगातार बढ़ते हुए इस संघर्ष के बीच लेबनान के संसद के स्पीकर Nabih Berri ने यह घोषणा की है कि बेरूत सरकार इस मामले में इसराइल के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कानूनी कदम उठाने की तैयारी कर रहा है। उन्होंने इसराइल पर लेबनान के भीतर नरसंहार जैसे अपराध करने का गंभीर आरोप भी लगाया है।