अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो उज्बेकिस्तान पहुंचे, C5+1 बैठक के बाद भारत के मुंबई और जामनगर जाएंगे

समरकंद (उज्बेकिस्तान): अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो रविवार को उज्बेकिस्तान के समरकंद पहुंचे। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने उनका स्वागत किया और इस मौके को एक ऐतिहासिक दिन बताया। रूबियो यहां व्यापार, निवेश और रणनीतिक सहयोग पर केंद्रित उच्च स्तरीय क्षेत्रीय बैठकों में हिस्सा लेंगे।
राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि वे C5+1 मंत्रिस्तरीय बैठक और अमेरिका-उज्बेकिस्तान बिजनेस काउंसिल का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे वाणिज्यिक संबंध गहरे होंगे और मध्य एशिया में नए अवसर खुलेंगे।
मध्य एशिया की यह मार्को रूबियो की पहली आधिकारिक यात्रा है। उनके साथ 200 से अधिक अमेरिकी बिजनेस एग्जीक्यूटिव्स का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल भी गया है। इस दौरे का मकसद अमेरिका और मध्य एशिया के बीच आर्थिक साझेदारी के एक नए युग की शुरुआत करना है।
यूरोन्यूज के मुताबिक, रूबियो सोमवार को C5+1 ढांचे के तहत पांच मध्य एशियाई देशों के विदेश मंत्रियों से मिलेंगे। इस बैठक में उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और किर्गिज़ गणराज्य के प्रतिनिधि शामिल होंगे। चर्चा मुख्य रूप से व्यापार, निवेश, महत्वपूर्ण खनिजों और क्षेत्रीय सुरक्षा पर होगी।
अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, 17 से 22 अक्टूबर तक चलने वाले इस दौरे में रूबियो समरकंद के अलावा भारत के मुंबई और जामनगर भी जाएंगे। भारत में वे वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों और बिजनेस लीडर्स से मुलाकात करेंगे ताकि रणनीतिक साझेदारी को मजबूत किया जा सके और ऊर्जा सहयोग व वाणिज्यिक निवेश को बढ़ावा दिया जा सके।
अपनी यात्रा पर निकलने से पहले रूबियो ने कहा कि वे उज्बेकिस्तान और भारत जा रहे हैं ताकि ट्रंप प्रशासन के लिए आर्थिक अवसरों को सुरक्षित किया जा सके।
वहीं, रूसी ईंधन बिक्री से जुड़े प्रतिबंधों को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा स्थगित किए जाने के बाद रूबियो ने भारत को एक महत्वपूर्ण सहयोगी बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी टैरिफ या प्रतिबंध लगाने से पहले भारत की ऊर्जा जरूरतों पर विचार किया जाना चाहिए।
रूबियो ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप 60 दिनों की अवधि का उपयोग यह विश्लेषण करने के लिए करना चाहते हैं कि इन टैरिफ का वैश्विक अर्थव्यवस्था और अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा। उन्होंने जिक्र किया कि भारत जैसे देशों ने स्वेच्छा से अपने ऊर्जा पोर्टफोलियो में विविधता लाई है, लेकिन वे अभी भी काफी मात्रा में ऊर्जा आयात कर रहे हैं।