अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने जामनगर में रिलायंस रिफाइनरी का दौरा किया और भारत को रिफाइनिंग सुपरपावर बताया

जामनगर: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो बुधवार को रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के तेल रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स के दौरे पर जामनगर पहुंचे। यह दौरा अमेरिका और भारत के बीच ऊर्जा साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जहां दोनों देश व्यापार समझौतों और कच्चे तेल की क्षेत्रीय आपूर्ति पर चर्चा कर रहे हैं।
रिलायंस का यह कॉम्प्लेक्स दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे जटिल सिंगल-साइट रिफाइनरी है। कंपनी के दस्तावेजों के मुताबिक, यहां प्रतिदिन 14 लाख बैरल कच्चे तेल को प्रोसेस करने की क्षमता है। इस रिफाइनरी का कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स 21.1 है, जो वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक रेटिंग है। इस सुविधा में अब तक 216 से ज्यादा अलग-अलग ग्रेड के कच्चे तेल को प्रोसेस किया जा चुका है।
इस साइट पर बड़े फ्लूइडाइज्ड कैटालिटिक क्रैकर्स, कोकर्स और पेटकोक गैसीफिकेशन प्लांट जैसे बड़े बुनियादी ढांचे मौजूद हैं। रिफाइनरी की कुल सालाना क्षमता लगभग 6.82 करोड़ टन है, जिसमें से करीब 3.52 करोड़ टन निर्यात के लिए समर्पित है।
मार्को रुबियो 20 अक्टूबर को मुंबई पहुंचे थे, जहां उन्होंने विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ तकनीक, रक्षा और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग पर बातचीत की। मुंबई प्रवास के दौरान उन्होंने यूएई के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान के साथ एक त्रिपक्षीय बैठक भी की।
रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी विदेश मंत्री ने भारत को रिफाइनिंग सुपरपावर करार दिया। उन्होंने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बारे में बताया कि अब केवल कुछ ही मुद्दे बचे हैं और जल्द ही इस समझौते पर अंतिम मुहर लग सकती है।
रुबियो ने मुंबई में ताज महल पैलेस होटल जाकर 2008 के मुंबई हमलों के पीड़ितों के स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की, जिनमें छह अमेरिकी नागरिक भी शामिल थे। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि पेट्रोलियम तब तक बेकार है जब तक उसे रिफाइन करके उपयोगी उत्पाद में न बदला जाए।
अमेरिका फिलहाल वेनेजुएला के कच्चे तेल के उत्पादन के लिए नए रास्ते तलाश रहा है। रुबियो ने पश्चिमी गोलार्ध की ऊर्जा, विशेष रूप से वेनेजुएला के हेवी क्रूड को रिफाइन करने के लिए रिलायंस के साथ और करीब से काम करने में रुचि दिखाई। सितंबर 2026 के अंत तक रिलायंस अमेरिका के बाहर वेनेजुएला के कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बनकर उभरा है।
अमेरिकी विदेश विभाग ने एक प्रेस नोट जारी कर व्यावसायिक निवेश और ऊर्जा सहयोग पर जोर दिया है। अमेरिका फिलहाल भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति करने वाला पांचवां सबसे बड़ा देश है और अधिकारी अमेरिकी ऊर्जा उत्पादों की बिक्री बढ़ाने के तरीकों पर विचार कर रहे हैं।
रिलायंस ने टेक्सास के ब्राउनस्विले में प्रस्तावित रिफाइनरी प्रोजेक्ट या इस दौरे के विशिष्ट परिणामों पर कोई विस्तृत सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है। विश्लेषकों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय व्यवधानों के समय जामनगर फैसिलिटी वैश्विक ईंधन बाजारों के लिए एक महत्वपूर्ण सप्लायर के रूप में काम करती है।
मार्को रुबियो अपने तीन दिवसीय भारत दौरे के बाद वापस अमेरिका लौटेंगे। अब अमेरिकी और भारतीय प्रतिनिधिमंडलों के आगामी बयानों से यह स्पष्ट होगा कि इन वार्ताओं का तेल आयात के पैटर्न पर क्या असर पड़ेगा।