पूर्व नौसेना प्रमुख त्रिपाठी की चेतावनी: संकरे समुद्री रास्तों की अस्थिरता से कई महाद्वीपों को नुकसान

पूर्व नौसेना प्रमुख दिनेश कुमार त्रिपाठी ने लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य में अस्थिरता से वैश्विक व्यापार और भारत पर पड़ने वाले आर्थिक असर की चेतावनी दी।

Gautam Sahu3 November 20262 min read0 viewsWorld
पूर्व नौसेना प्रमुख त्रिपाठी की चेतावनी: संकरे समुद्री रास्तों की अस्थिरता से कई महाद्वीपों को नुकसान

नई दिल्ली: पूर्व नौसेना प्रमुख दिनेश कुमार त्रिपाठी ने चेतावनी दी है कि लाल सागर, होर्मुज जलडमरूमध्य और दक्षिण चीन सागर जैसे संकीर्ण जलमार्गों में अस्थिरता के कारण महाद्वीपीय स्तर पर आर्थिक नुकसान हो सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति से ऊर्जा आपूर्ति, व्यापार और विकास संसाधनों पर सीधा असर पड़ता है।

नई दिल्ली में आयोजित इंडो-पैसिफिक रीजनल डायलॉग (IPRD) को संबोधित करते हुए एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री वातावरण इस समय काफी अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है। उनके मुताबिक, भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा, सशस्त्र संघर्ष और तकनीकी बदलाव समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय वाणिज्य पर दबाव बढ़ा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य में हुए व्यवधानों ने यह साबित कर दिया है कि सीमित जलक्षेत्र की अस्थिरता के परिणाम कई महाद्वीपों तक फैल सकते हैं। इसके अलावा, दक्षिण चीन सागर में जारी तनाव, काला सागर के घटनाक्रम और महत्वपूर्ण अंडरसी इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा को लेकर चिंताएं समुद्री देशों के सामने बड़ी चुनौतियां पेश कर रही हैं।

GulfHindi की हर खबर सबसे पहलेJoin

भारत पर इसके असर का जिक्र करते हुए पूर्व नौसेना प्रमुख ने कहा कि पश्चिम एशिया में अस्थिरता भारत के लिए महंगी साबित हुई है। उन्होंने बताया कि ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार के लिए समुद्री मार्गों पर निर्भरता के कारण शिपिंग में रुकावट, माल ढुलाई (फ्रेट) और बीमा प्रीमियम की बढ़ती लागत अर्थव्यवस्था और संसाधनों पर अतिरिक्त बोझ डालती है।

त्रिपाठी ने कहा कि जिन संसाधनों का उपयोग आर्थिक प्रगति के लिए होना चाहिए था, उन्हें बाहरी झटकों को सहने में लगाना पड़ रहा है। उन्होंने जोर दिया कि समुद्री अस्थिरता उन देशों पर भी भारी आर्थिक और मानवीय लागत थोप सकती है जो संघर्ष के स्रोत से बहुत दूर हैं। सीमित संसाधनों वाले देशों के लिए ऐसे व्यवधान वर्षों की विकासात्मक प्रगति को खतरे में डाल सकते हैं।

उन्होंने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में आपसी सम्मान, तकनीकी और शैक्षणिक साझेदारी के आधार पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग का आह्वान किया। एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि बेहतर ज्ञान और मजबूत तकनीकी क्षमताओं के जरिए देश अपनी कमजोरियों को समझ सकते हैं और अधिक आत्मविश्वास के साथ प्रतिक्रिया दे सकते हैं।

Share:

Comments

Leave a comment