Mark Ruffalo पर लगा यहूदी-विरोधी होने का आरोप, Paramount-Warner Bros डील पर दिया था बयान.

हॉलीवुड के मशहूर अभिनेता Mark Ruffalo इन दिनों एक बड़े विवाद में फंस गए हैं, जहां उन पर यहूदी-विरोधी होने के गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब उन्होंने एलिसन परिवार द्वारा पैरामाउंट स्काईडांस के माध्यम से वार्नर ब्रॉस डिस्कवरी के प्रस्तावित $111 बिलियन के अधिग्रहण की आलोचना की थी। 27 अगस्त 2026 को अल जज़ीरा इंग्लिश द्वारा प्रसारित एक रिपोर्ट में इस पूरे घटनाक्रम और विवाद पर विस्तार से प्रकाश डाला गया है, जिससे मीडिया जगत में हलचल मच गई है।
कम्पनी के सैन्य करारों पर उठाए थे सवाल
अभिनेता मार्क रफालो ने अपने बयान में एलिसन परिवार के ओरेकल कंपनी के साथ पुराने संबंधों पर चिंता जताई थी। ओरेकल वही कंपनी है जिसने दशकों से इज़राइल रक्षा बलों, वहां की सरकार और पुलिस को तकनीक मुहैया कराई है। उन्होंने विशेष रूप से ओरेकल की कार्यकारी उपाध्यक्ष और पैरामाउंट बोर्ड की सदस्य सफ़्रा कैटज़ की साल 2024 की टिप्पणियों के साथ-साथ ओरेकल के बिक्री प्रमुख शमुलिक हाउज़र के साल 2025 के उस बयान का हवाला दिया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि इज़राइल का समर्थन करना कंपनी के डीएनए में शामिल है।
हॉलीवुड संगठनों ने जताई कड़ी आपत्ति
इस आलोचना के बाद हॉलीवुड के लगभग 1,000 सदस्यों का प्रतिनिधित्व करने वाले 'द ब्रिगेड' नामक उद्योग समूह ने नाराजगी जताई। इसके अलावा एंटी-डिफेमेशन लीग, साइमन विसेनथल सेंटर, द क्रिएटिव कम्युनिटी फॉर पीस, लॉस एंजिल्स यहूदी फेडरेशन और ज़ायनिस्ट ऑर्गनाइजेशन ऑफ अमेरिका जैसे कई संगठनों ने मार्क रफालो पर यहूदी-विरोधी ट्रॉप्स का इस्तेमाल करने का आरोप मढ़ा। 'द ब्रिगेड' का कहना था कि किसी व्यावसायिक लेनदेन के संदर्भ में इज़राइल और यहूदी अधिकारियों का नाम घसीटना पूरी तरह से अस्वीकार्य है। पैरामाउंट स्काईडांस ने भी एक बयान जारी कर कहा कि जब यहूदी-विरोधी बातें कही जाती हैं तो उन्हें काफी दुख होता है और इस मर्जर को लेकर 'नरसंहार' तथा 'रंगभेद' जैसे शब्दों का प्रयोग करना सीमा लांघने जैसा है।
अभिनेता ने आरोपों को बताया पूरी तरह बेबुनियाद
अपने ऊपर लगे तमाम आरोपों को खारिज करते हुए मार्क रफालो ने इन्हें चौंकाने वाला और पूरी तरह से बेईमान करार दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी किसी भी समुदाय के खिलाफ नहीं थी, बल्कि उनका निशाना सैन्य प्रौद्योगिकी के अनुबंध थे। उन्होंने यहूदी लोगों के प्रति अपने दिल में गहरा प्रेम और सम्मान होने की बात भी कही। उनके इस रुख का समर्थन अभिनेत्री हन्ना आइनबिंदर और जेन फोंडा समेत कई अन्य लोगों ने भी किया। हन्ना आइनबिंदर ने उन दावों को हास्यास्पद बताया जिनमें यह कहा गया था कि यह आलोचना एलिसन परिवार के धर्म से प्रेरित थी।
मर्जर पर कानूनी और संरचनात्मक चुनौतियां
अल जज़ीरा की रिपोर्ट में यह सुझाव भी दिया गया है कि मार्क रफालो के खिलाफ खड़े किए गए इस विवाद का इस्तेमाल शायद इस बड़े सौदे की असली संरचनात्मक कमियों से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए किया जा रहा है। इस सौदे को लेकर सिर्फ जुबानी जंग ही नहीं छिड़ी है, बल्कि अमेरिका के 12 राज्यों के महाधिवक्ता यानी अटॉर्नी जनरल मिलकर इस डील के खिलाफ एंटीट्रस्ट यानी एकाधिकार विरोधी कानूनों के तहत कानूनी चुनौती दे रहे हैं। उनका मानना है कि इस अधिग्रहण से बाजार में प्रतिस्पर्धा खत्म होने का खतरा पैदा हो सकता है और अमेरिकी नौकरियां भी खतरे में पड़ सकती हैं।
वर्तमान स्थिति यह है कि अमेरिका के मीडिया बाजार के 90% हिस्से पर केवल छह कंपनियों का नियंत्रण है। यदि यह अधिग्रहण पूरा हो जाता है तो सीएनएन और सीबीएस न्यूज जैसे बड़े मीडिया संस्थान लैरी एलिसन और उनके बेटे डेविड एलिसन के नियंत्रण में चले जाएंगे। आपको बता दें कि लैरी एलिसन पहले भी 'फ्रेंड्स ऑफ द आईडीएफ' को दान दे चुके हैं और उन्होंने साल 2024 के अमेरिकी चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप के अभियान का भी समर्थन किया था, जिसके कारण यह सौदा लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है।