अमेरिका के पूर्व एनएसए एचआर मैकमास्टर ने भारत के प्रति सहानुभूति जताते हुए रूस के साथ तेल और यूरेनियम के व्यापार पर दिया बड़ा बयान

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार Lt Gen HR McMaster (Retd) ने हाल ही में भारत के रणनीतिक हालातों और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने वाशिंगटन से अपील की है कि भारत की सुरक्षा और उसके पड़ोसी देशों के साथ जटिल संबंधों को ध्यान में रखा जाए। New Delhi में दिए गए एक साक्षात्कार में उन्होंने माना कि भारत चारों तरफ से जटिल सुरक्षा चुनौतियों से घिरा हुआ है और ऐसे में अमेरिका को भारत के फैसलों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करना चाहिए।
रूस के साथ व्यापार और अमेरिकी नीतियों पर सवाल
पूर्व एनएसए ने अमेरिकी प्रशासन की नीतियों पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि यह बहुत अजीब बात है कि अमेरिका खुद रूस से यूरेनियम खरीद रहा है और दूसरी तरफ रूस से ऊर्जा आयात करने वाले देशों पर शिकंजा कसने की बात कर रहा है। अमेरिकी संसद US House of Representatives में हाल ही में पारित हुए Lindsey O Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 के तहत रूसी ऊर्जा आयात करने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने का प्रावधान है। इस कानून के पास होने के बाद से वैश्विक राजनीति में चर्चा तेज हो गई है कि क्या इससे भारत जैसे देशों पर दबाव बढ़ेगा।
भारत और अमेरिका के संबंधों पर असर
मैकमास्टर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत के सामने पाकिस्तान और चीन जैसे दो परमाणु शक्ति संपन्न देश हैं, जो लगातार क्षेत्रीय अस्थिरता पैदा करते हैं। उन्होंने पाकिस्तान के दोहरे रविड़े पर गहरी निराशा जताई और कहा कि इस वजह से भारत और अमेरिका को एक दूसरे के करीब आना चाहिए। चीन की आक्रामक नीतियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आज के समय में हर देश के सामने सवाल संप्रभुता और अधीनता के बीच का है। अमेरिका हमेशा संप्रभुता के पक्ष में खड़ा रहा है और भारतीय नेतृत्व को अमेरिकी साझेदारी पर भरोसा रखना चाहिए।
व्यापारिक वार्ता और आगे की स्थिति
भारत का विदेश मंत्रालय Ministry of External Affairs इन सभी अंतरराष्ट्रीय व्यापार कानूनों और टैरिफ प्रस्तावों पर कड़ी नजर बनाए हुए है। भारत सरकार की प्राथमिकता हमेशा से देश की ऊर्जा सुरक्षा और विविधता को बनाए रखना रही है। इसी सिलसिले में आने वाले दिनों में G20 Trade Ministers की बैठक Wisconsin में होने वाली है, जहां दोनों देशों के बीच उच्च स्तर पर व्यापारिक मुद्दों और रणनीतिक साझेदारी पर बातचीत जारी रहेगी। इस बैठक से दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों को एक नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।