Dubai में भारतीय अधिकारियों ने की अहम बैठक, खाड़ी देशों में काम करने वाले मजदूरों की समस्याओं पर हुई चर्चा.

Praggya Singh sabal25 September 20263 min read28 viewsUAE
Dubai में भारतीय अधिकारियों ने की अहम बैठक, खाड़ी देशों में काम करने वाले मजदूरों की समस्याओं पर हुई चर्चा.

दुबई में भारतीय प्रवासियों और खासकर ब्लू-कॉलर मजदूरों की समस्याओं को दूर करने के लिए भारत सरकार ने कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। 25 सितंबर 2026 को भारत की विदेश मंत्रालय की सचिव श्रीप्रिया रंगनाथन ने दुबई स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास में दो बड़ी उच्चस्तरीय बैठकें कीं। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य विदेशों में काम कर रहे भारतीय कामगारों को पेश आ रही परेशानियों का समाधान निकालना और रिक्रूटमेंट एजेंसियों के नियमों को और सख्त करना था। खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय कामगारों के लिए यह बैठक बहुत राहत भरी खबर है क्योंकि इसमें सीधे तौर पर उनकी सुरक्षा और अधिकारों पर बात की गई है।

कामगारों की सुरक्षा और आंकड़े

विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2023 से 2025 के बीच विदेश में काम के दौरान 800 से ज्यादा भारतीयों की मौत workplace एक्सीडेंट्स में हुई है। इनमें से 55 प्रतिशत मौतें अकेले गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल यानी GCC देशों में हुईं। अकेले सऊदी अरब में 182 और UAE में 128 लोगों की जान गई। मौजूदा समय में UAE की कुल आबादी में 4.3 मिलियन से अधिक भारतीय रहते हैं, जबकि सऊदी अरब में 2.7 मिलियन और कुल मिलाकर छह GCC देशों में लगभग 10 मिलियन भारतीय लोग रह रहे हैं। इन आंकड़ों को देखकर साफ पता चलता है कि खाड़ी देशों में काम करने वाले हमारे मजदूरों की सुरक्षा कितनी जरूरी है।

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मजदूरों की बैठक में उठी वेतन और पासपोर्ट रोकने की समस्याएं

पहली बैठक भारतीय समुदाय के लोगों के साथ हुई जिसमें मजदूरों ने अपनी कई गंभीर समस्याएं अधिकारियों के सामने रखीं। इनमें मुख्य रूप से समय पर सैलरी न मिलना, मालिकों द्वारा पासपोर्ट अपने पास रख लेना और मदद मांगने में आने वाली मुश्किलें शामिल थीं। मजदूरों ने बताया कि उन्हें 24/7 हेल्पलाइन नंबर और प्रवासी भारतीय सहायता केंद्र से मदद पाने में कई बार दिक्कतें आती हैं। इन सभी शिकायतों को अधिकारियों ने बहुत गंभीरता से सुना और जल्द ही समाधान का भरोसा दिया। सरकार की कोशिश है कि गल्फ में रहने वाले किसी भी भारतीय को अपनी छोटी-छोटी जरूरतों या कागजी कामों के लिए परेशान न होना पड़े।

रिक्रूटमेंट एजेंसियों पर कड़ी नजर

दूसरी बैठक में रिक्रूटमेंट एजेंसियों और लीगल फर्मों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान सुरक्षित प्रवास, स्किल्ड लेबर और नियमों का कड़ाई से पालन करने पर जोर दिया गया। हाल ही में बिहार के शेख मेरज का मामला सामने आया था जिसमें नौकरी की शर्तों को लेकर धोखाधड़ी की गई थी, जिसके बाद से रिक्रूटमेंट एजेंसियों पर जनता की नजरें टिकी हुई हैं। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि भारत से गल्फ जाने वाले हर एक युवा को वही काम और पैसा मिले जो उसे देश में वादा करके भेजा गया था, ताकि वहां जाकर किसी को धोखा न खाना पड़े।

कतर में प्रवासी मजदूरों के लिए नया समझौता

इसी बीच कतर से भी प्रवासियों के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है। 25 सितंबर 2026 को तेलंगाना गल्फ समिथ यानी TGS और प्रवासी मित्र मजदूर यूनियन यानी PMLU के बीच एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। यह एमओयू प्रवासी मजदूरों को कानूनी अधिकार, इमरजेंसी में मदद और वापस देश लौटने से जुड़ी सहायता प्रदान करेगा। यह पूरा नेटवर्क बिल्डिंग एंड वुड वर्कर्स इंटरनेशनल के नियमों के तहत काम करेगा, जिससे कतर में रहने वाले भारतीय मजदूरों को बहुत बड़ा कानूनी सहारा मिल जाएगा।

पश्चिम एशिया के संघर्ष के बावजूद जारी है भर्ती

साल 2026 में पश्चिम एशिया के तनाव और संघर्ष के कारण एक मिलियन से ज्यादा भारतीयों को अस्थाई तौर पर वापस लौटना पड़ा था, फिर भी खाड़ी देशों के लिए नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया लगातार जारी है। उत्तर प्रदेश के रोजगार संगम पोर्टल पर हाल ही में दुबई में कंस्ट्रक्शन से जुड़े काम के लिए विज्ञापन जारी किया गया था जिसमें सैलरी 1,450 AED प्रति माह तय की गई थी और इसके लिए आवेदन करने की आखिरी तारीख 26 सितंबर 2026 रखी गई थी। इससे यह साफ जाहिर होता है कि खाड़ी देशों में भारतीय मजदूरों की मांग आज भी उतनी ही बनी हुई है और लोग बेहतर भविष्य के लिए लगातार वहां का रुख कर रहे हैं।

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