UNMOGIP अब अप्रासंगिक है, शिमला समझौते के बाद इसकी जरूरत नहीं: विदेश मंत्रालय

भारत सरकार ने एक बार फिर अपना कड़ा रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि यूनाइटेड नेशंस मिलिट्री ऑब्जर्वर ग्रुप इन इंडिया एंड पाकिस्तान (UNMOGIP) अब अपनी प्रासंगिकता खो चुका है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने यह बात संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की इस्लामाबाद स्थित UNMOGIP कार्यालय की हालिया यात्रा के जवाब में कही है। भारत का मानना है कि 1972 के ऐतिहासिक शिमला समझौते के बाद इस सैन्य पर्यवेक्षक समूह की कोई जरूरत नहीं रह गई है।
शुक्रवार को आयोजित साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने जब गुटेरेस की यात्रा पर सवाल पूछे गए, तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "यह हमारा निरंतर और स्थिर रुख रहा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच हस्ताक्षरित शिमला समझौते के बाद UNMOGIP अपनी प्रासंगिकता खो चुका है।" गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने 6 अक्टूबर को पाकिस्तान की अपनी आधिकारिक यात्रा के दौरान इस कार्यालय का दौरा किया था, जहाँ उनकी मुलाकात प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ और राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों से हुई थी।
शिमला समझौते का महत्व और UNMOGIP का इतिहास
UNMOGIP की स्थापना साल 1949 में भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम की निगरानी के लिए की गई थी। हालांकि, 2 जुलाई 1972 को तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और पाकिस्तान के राष्ट्रपति जुल्फिकार अली भुट्टो के बीच हुए शिमला समझौते ने पूरी स्थिति बदल दी। इस समझौते के तहत दोनों देशों ने यह तय किया था कि वे अपने आपसी मतभेदों को द्विपक्षीय वार्ताओं और शांतिपूर्ण माध्यमों से सुलझाएंगे।
इस समझौते की मुख्य बातें निम्नलिखित थीं:
- दोनों देश एक-दूसरे की क्षेत्रीय अखंडता, संप्रभुता और राजनीतिक स्वतंत्रता का सम्मान करेंगे।
- एक-दूसरे के खिलाफ बल प्रयोग या धमकी का सहारा नहीं लिया जाएगा।
- जब तक मुद्दों का अंतिम समाधान नहीं हो जाता, तब तक कोई भी पक्ष एकतरफा तौर पर स्थिति को बदलने की कोशिश नहीं करेगा।
भारत लगातार यह कहता रहा है कि जम्मू-कश्मीर सहित दोनों देशों के बीच के किसी भी विवाद को सुलझाने के लिए शिमला समझौते द्वारा स्थापित द्विपक्षीय ढांचा ही एकमात्र मान्य रास्ता है, और इसमें किसी तीसरे पक्ष या पुरानी अंतरराष्ट्रीय निगरानी संस्थाओं की कोई भूमिका नहीं है।