हूती हमलों के खिलाफ सऊदी, तुर्की और पाकिस्तान ने सक्रिय किया 'मक्का डिफेंस पैक्ट'

Gautam Sahu9 October 20262 min read0 viewsSaudi
हूती हमलों के खिलाफ सऊदी, तुर्की और पाकिस्तान ने सक्रिय किया 'मक्का डिफेंस पैक्ट'

यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा किए जा रहे मिसाइल और ड्रोन हमलों की बढ़ती तीव्रता के बीच सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान ने एक बड़ा कदम उठाया है। इन तीनों देशों ने आधिकारिक तौर पर 'मक्का डिफेंस पैक्ट' (Mecca Defence Pact) को सक्रिय कर दिया है। यह एक त्रिपक्षीय सुरक्षा समझौता है, जिसका मकसद क्षेत्र में सुरक्षा सुनिश्चित करना और हूती हमलों का सामूहिक मुकाबला करना है। 7 अगस्त 2026 को लागू हुए इस समझौते में एक खास सामूहिक सुरक्षा क्लॉज शामिल है, जो नाटो (NATO) के आर्टिकल 5 की तर्ज पर है। इसका सीधा मतलब यह है कि यदि इस गठबंधन के किसी एक सदस्य देश पर हमला होता है, तो उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा।

इस गठबंधन की ताकत तीनों देशों की अलग-अलग विशेषज्ञताओं में है, जिसमें सऊदी अरब के वित्तीय संसाधन, तुर्की की डिफेंस टेक्नोलॉजी और पाकिस्तान की सैन्य क्षमताएं शामिल हैं। हाल ही में रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट और अब्हा इंटरनेशनल एयरपोर्ट सहित कई सऊदी शहरों पर हुए हूती हमलों के बाद, 5 अक्टूबर 2026 को रियाद में स्ट्रैटेजिक पॉलिटिकल एंड डिफेंस कमेटी की एक आपातकालीन बैठक हुई। इस बैठक में सामूहिक रक्षा प्रतिबद्धताओं को तुरंत लागू करने और सऊदी अरब में सैन्य बल तैनात करने का फैसला लिया गया।

गठबंधन की भूमिका और सैन्य तैनाती

GulfHindi की हर खबर सबसे पहलेJoin

इस नए सुरक्षा ढांचे के संचालन के लिए पाकिस्तान के लेफ्टिनेंट जनरल नौमान महमूद को तीन साल के कार्यकाल के लिए गठबंधन का पहला महासचिव नियुक्त किया गया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सऊदी सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है, और पाकिस्तानी सेना ने पुष्टि की है कि उसके जवान पहले से ही किंगडम में अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं।

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तानी और तुर्की सेनाएं मुख्य रूप से निगरानी (reconnaissance) और सहायता भूमिकाओं पर ध्यान केंद्रित करेंगी, जबकि वास्तविक कॉम्बैट ऑपरेशन्स सऊदी सेना द्वारा संभाले जाएंगे। वहीं, तुर्की ने 8 अक्टूबर को रक्षा सहायता का आकलन करने की बात कही थी और बाद में स्पष्ट किया कि उनकी मदद खुफिया जानकारी साझा करने, सैन्य उपकरणों और हथियार प्रणालियों तक सीमित रहेगी, जब तक कि व्यापक तैनाती के लिए संसदीय मंजूरी नहीं मिल जाती।

उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान के सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने उन खबरों को 'फर्जी और मनगढ़ंत' बताया है जिनमें दावा किया गया था कि पाकिस्तानी वायु सेना के जेट हूतियों के खिलाफ हमले कर रहे हैं। यह पूरा गठबंधन सितंबर 2025 में पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए एक द्विपक्षीय समझौते का विकसित रूप है, जो अब क्षेत्रीय सुरक्षा के नजरिए से एक बड़े बदलाव का संकेत दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अमेरिका पर निर्भरता कम करने की एक रणनीति हो सकती है, हालांकि ईरान के साथ जटिल संबंधों और अलग-अलग खतरों के आकलन के कारण इस गठबंधन के सामने चुनौतियां भी बनी रहेंगी।

Share:

Comments

Leave a comment