वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की रिपोर्ट के मुताबिक मिडिल ईस्ट और नॉर्थ अफ्रीका में AI से 2030 तक 1 ट्रिलियन डॉलर का फायदा मिल सकता है

Gautam Sahu15 October 20262 min read0 viewsWorld
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की रिपोर्ट के मुताबिक मिडिल ईस्ट और नॉर्थ अफ्रीका में AI से 2030 तक 1 ट्रिलियन डॉलर का फायदा मिल सकता है

जेनेवा: वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की दो नई रिपोर्टों में कहा गया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) साल 2030 तक मिडिल ईस्ट और नॉर्थ अफ्रीका (MENA) क्षेत्र में 1 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा की आर्थिक और स्थिरता वैल्यू पैदा कर सकता है। हालांकि, रिपोर्ट में यह चेतावनी भी दी गई है कि इस तकनीक का विस्तार ग्रिड कनेक्शन को तेज करने और ऊर्जा व पानी की बढ़ती मांग को सही तरीके से मैनेज करने पर निर्भर करेगा।

बैन एंड कंपनी के साथ मिलकर तैयार की गई "अनलॉकिंग वैल्यू: AI फॉर रेजिलिएंट ग्रोथ इन MENA" और सऊदी रिसर्च एंड मीडिया ग्रुप (SRMG) के सहयोग से बनी "ऑप्टिमाइजिंग हाइपरस्केल डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर इन MENA" रिपोर्ट में बताया गया है कि क्षेत्र अपनी AI महत्वाकांक्षाओं को टिकाऊ आर्थिक विकास में कैसे बदल सकता है। इसमें इस बात पर जोर दिया गया है कि बड़े पैमाने पर विकास के लिए मजबूत ऊर्जा, पानी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरी हैं।

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के मैनेजिंग डायरेक्टर मारून कैरूज ने बताया कि MENA क्षेत्र के पास निवेश की क्षमता, संसाधन और महत्वाकांक्षा है कि वह AI आधारित विकास का वैश्विक केंद्र बन सके। उन्होंने कहा कि इस क्षमता को हासिल करने के लिए पानी और ऊर्जा प्रणालियों, डेटा-सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर और स्थिरता समाधानों के लिए AI के उपयोग में नवाचार की जरूरत है।

"अनलॉकिंग वैल्यू" रिपोर्ट के मुताबिक, इस 1 ट्रिलियन डॉलर की वैल्यू में वित्तीय क्षेत्र से 200 अरब डॉलर की टिकाऊ फाइनेंसिंग, पब्लिक सेक्टर के जरिए 370 अरब डॉलर का टिकाऊ निवेश, लंबी अवधि की संपत्ति के नुकसान से बचाए गए 250 अरब डॉलर, ऊर्जा क्षेत्र की बेहतर स्थिरता से 90 अरब डॉलर की ग्रोथ और क्रॉस-सेक्टर पार्टनरशिप से 100 अरब डॉलर के टिकाऊ प्रोजेक्ट शामिल हैं।

रिपोर्ट में AI के इस्तेमाल और उसकी धारणा के बीच अंतर को भी दिखाया गया है। MENA चीफ सस्टेनेबिलिटी ऑफिसर्स नेटवर्क द्वारा सर्वे किए गए 89 प्रतिशत स्थिरता लीडर्स ने माना कि संगठनात्मक लक्ष्यों के लिए AI में काफी क्षमता है, लेकिन केवल 40 से 55 प्रतिशत ने ही बताया कि उनके यहां टिकाऊ AI का उपयोग 'पायलटिंग' या 'स्केल्ड' स्टेज तक पहुंच पाया है।

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