ग्लोबल मार्केट शेयर के लिए मिडिल ईस्ट के तेल उत्पादकों में छिड़ी जंग

मिडिल ईस्ट के तेल उत्पादक देश अब एक ऐसी रणनीतिक लड़ाई में उतर चुके हैं, जहां मकसद है उस ग्लोबल मार्केट शेयर को वापस पाना जो ईरान युद्ध के कारण पिछले आठ महीनों में खो गया था। ओमान ऑब्जर्वर की एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान और पूर्व ओपेक (OPEC) सदस्य देशों के बीच निर्यात को लेकर प्रतिस्पर्धा इतनी बढ़ गई है कि वे एक-दूसरे के आमने-सामने आ गए हैं। यह होड़ ऐसे समय में शुरू हुई है जब होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के जरिए होने वाले ट्रांजिट ऑपरेशन्स में धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिल रहे हैं।
डेटा एनालिटिक्स फर्म केप्लर (Kpler) के मुताबिक, पिछले दो हफ्तों में होर्मुज जलडमरूमध्य से कच्चे तेल का निर्यात औसतन 12 मिलियन बैरल प्रतिदिन (bpd) रहा, जो युद्ध से पहले के स्तर का लगभग 80% है। हालांकि, यह रास्ता अभी भी बेहद खतरनाक बना हुआ है। समुद्री सुरक्षा सूत्रों का कहना है कि ईरानी सेना लगातार जहाजों को निशाना बना रही है, और पिछले दो हफ्तों में लगभग हर दिन एक टैंकर पर हमला हुआ है।
खतरनाक रास्तों और वैकल्पिक विकल्पों का सहारा
पिछले हफ्ते टैंकरों पर हुए हमलों में अचानक बढ़ोतरी के बाद इस जलमार्ग पर ट्रैफिक काफी गिर गया। मंगलवार को केवल सात कमोडिटी जहाजों ने इस रास्ते का इस्तेमाल किया, जो 23 जुलाई के बाद सबसे कम संख्या है। बुधवार को यह संख्या बढ़कर 10 हुई, लेकिन यह रविवार और सोमवार को देखे गए 20 से अधिक जहाजों के मुकाबले काफी कम है। केप्लर के विश्लेषकों का कहना है कि युद्ध के समय के उच्च स्तर से कच्चे तेल की मात्रा में 27% की गिरावट आई है, जो अब लगभग 10.1 मिलियन bpd पर स्थिर हुई है।
इस जोखिम को कम करने के लिए सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कुवैत और इराक जैसे खाड़ी देशों ने वैकल्पिक रास्तों का सहारा लिया है। ओमान की खाड़ी के तट और लाल सागर के टर्मिनलों से होने वाला निर्यात युद्ध से पहले के स्तर से दोगुना बढ़कर 6.7 मिलियन bpd तक पहुंच गया है। इस विविधीकरण की वजह से ही मिडिल ईस्ट का कुल कच्चा तेल निर्यात 3 अक्टूबर तक लगभग 18 मिलियन bpd के पुराने स्तर पर बना रहा है।
एनर्जी एस्पेक्ट्स (Energy Aspects) की मानें तो अक्टूबर में वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति की कमी घटकर 250,000 bpd रह जाएगी, जो मई में दर्ज 4 मिलियन bpd की भारी कमी के मुकाबले एक बड़ा सुधार है। हालांकि, खाड़ी उत्पादक देश अधिक बीमा और शिपिंग लागत के बावजूद अपने ग्राहकों से रिश्ते सुधारने और निर्यात बढ़ाने के लिए तैयार हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि आम उपभोक्ताओं को पेट्रोल की कीमतों में तुरंत कोई राहत मिलने की उम्मीद कम है।