आर्थिक अवसरों की तलाश में जान जोखिम में डाल यमन के रास्ते खाड़ी देशों की ओर बढ़ रहे हैं हजारों प्रवासी

यमन: यमन में चल रहे संघर्ष और अस्थिरता के बावजूद बड़ी संख्या में प्रवासी अपनी जान जोखिम में डालकर इस देश में दाखिल हो रहे हैं। ये लोग यमन को एक ट्रांजिट पॉइंट की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि सऊदी अरब, यूएई और ओमान जैसे खाड़ी देशों में पहुंचकर आर्थिक अवसर पा सकें।
हॉर्न ऑफ अफ्रीका, खासकर इथियोपिया से आने वाले हजारों लोग इस रास्ते का चुनाव कर रहे हैं। इसे 'ईस्टर्न रूट' के नाम से जाना जाता है, जो दुनिया के सबसे सक्रिय और खतरनाक अनियमित प्रवासन गलियारों में से एक माना जाता है।
इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन (IOM) के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2026 में इस प्रवासन की रफ्तार काफी बढ़ी है। सितंबर 2026 के अंत तक यमन में प्रवेश करने वाले प्रवासियों की संख्या 1,34,100 दर्ज की गई, जो 2025 के पूरे साल के आंकड़ों के मुकाबले 22 प्रतिशत ज्यादा है।
यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हो रही है जब क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ गई है, जिसकी वजह से करीब 2,17,000 यमनी लोग अपने ही देश में विस्थापित हो चुके हैं। इस यात्रा के खतरों का अंदाजा 8-9 अक्टूबर 2026 को जिबूती के उत्तरी तट के पास हुए एक हादसे से लगाया जा सकता है।
एक जहाज डूबने के कारण कम से कम 139 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 15 बच्चे भी शामिल थे। इस हादसे में 116 से ज्यादा लोग लापता हैं। जहाज पर सवार 305 यात्रियों में से केवल 82 इथियोपियाई नागरिक बच पाए, जिन्हें अब IOM की मदद मिल रही है।
IOM की महानिदेशक एमी पोप ने बताया कि सुरक्षित विकल्पों की कमी के कारण प्रवासी इन जोखिम भरे सफर पर निकल रहे हैं। उन्होंने सरकारों से खोज और बचाव कार्यों में सहायता बढ़ाने और सुरक्षित व नियमित प्रवासन रास्ते बनाने की अपील की है।
समुद्री यात्रा के खतरों के अलावा, कई प्रवासी यमन में ही फंस जाते हैं। वहां उन्हें शोषण, दुर्व्यवहार और मानवीय सेवाओं की कमी का सामना करना पड़ता है। जिबूती में संयुक्त राष्ट्र के रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर जोस बाराहोना ने कहा कि सालाना 2.5 लाख से 3 लाख प्रवासियों का यह प्रवाह स्थानीय संसाधनों पर भारी दबाव डाल रहा है।