ईरान की सैन्य क्षमता खत्म करने के लिए निर्णायक हमले की जरूरत: माइक पोम्पिओ
पूर्व अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने ईरान की सैन्य क्षमता खत्म करने के लिए निर्णायक सैन्य कार्रवाई और नेतृत्व को निशाना बनाने का समर्थन किया।

वॉशिंगटन: अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने ईरान के खिलाफ निर्णायक सैन्य हमलों की जोरदार मांग की है। 30 अक्टूबर 2026 को दिए अपने बयान में उन्होंने तर्क दिया कि ईरान की सैन्य क्षमताओं को पूरी तरह नष्ट करने के लिए ऐसे ऑपरेशन बेहद जरूरी हैं।
पोम्पिओ ने कहा कि हूती समूह से पैदा होने वाला खतरा सिर्फ सऊदी अरब तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र और दुनिया के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है। उन्होंने ईरान के नेतृत्व को निशाना बनाने सहित सैन्य उपायों का स्पष्ट रूप से समर्थन किया।
इसी दिन दिए इंटरव्यू में पोम्पिओ ने फरवरी 2026 में शुरू हुए अमेरिकी-इजरायली संयुक्त सैन्य अभियान का बचाव किया। उन्होंने इस ऑपरेशन को बहुत देर से शुरू हुआ बताया और कहा कि यह करीब 7 से 17 साल पहले होना चाहिए था।
उनके मुताबिक, अगर टकराव पहले हुआ होता तो ईरान को अपने बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हथियारों का विस्तार करने से रोका जा सकता था। पोम्पिओ ने चेतावनी दी कि अगर अब दो से पांच साल की और देरी हुई, तो ईरान उत्तर कोरिया जैसा रक्षा तंत्र विकसित कर लेगा, जिससे उसका परमाणु बुनियादी ढांचा सुरक्षित हो जाएगा।
पूर्व विदेश मंत्री ने 2015 के परमाणु समझौते की भी आलोचना की और दावा किया कि यह ईरान के व्यापक सैन्य खतरों से निपटने में नाकाम रहा।
दूसरी ओर, खबरों के अनुसार अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के कमांडर ब्रैड कूपर ने व्हाइट हाउस की ब्रीफिंग के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सैन्य विकल्पों के अपडेट दिए हैं। प्रशासन एक बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान पर विचार कर रहा है और क्षेत्र में रसद सुदृढ़ीकरण तैनात किया जा रहा है।
अमेरिकी अधिकारियों ने अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों को नवंबर 3 के मध्यावधि चुनावों के बाद संभावित हमलों के लिए तैयार रहने की सलाह दी है, क्योंकि ईरान की ओर से जवाबी कार्रवाई हो सकती है। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि वह मध्यावधि चुनावों से पहले हमलों की अनुमति नहीं देंगे, लेकिन उन्होंने इस संघर्ष को जल्द खत्म करने और यह सुनिश्चित करने की इच्छा जताई है कि ईरान के पास कभी परमाणु हथियार न आएं।