ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने बदला शासन, सुरक्षा नेटवर्क को अहम कमान
ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने विकेंद्रीकृत शासन प्रणाली अपनाई है। अमेरिका के साथ तनाव के बीच सुरक्षा नेटवर्क का प्रभाव बढ़ा है।

तेहरान: मार्च 2026 में सर्वोच्च नेता बनने के बाद मोजतबा खामेनेई ने ईरान में निर्णय लेने की प्रक्रिया को पूरी तरह बदल दिया है। अब देश में एक विकेंद्रीकृत और सुरक्षा-केंद्रित शासन प्रणाली लागू की गई है। अपने पूर्ववर्ती के व्यक्तिगत नेतृत्व के विपरीत, मोजतबा खामेनेई लिखित आदेशों और बिचौलियों के जरिए शासन चला रहे हैं।
इस नई व्यवस्था में सैन्य और सुरक्षा नेटवर्क के सामूहिक ढांचे पर काफी भरोसा जताया जा रहा है। अक्टूबर 2026 में हुई चार उच्च स्तरीय बैठकों में इस बदलाव की झलक दिखी। इन बैठकों में संसद, न्यायपालिका, राष्ट्रीय सुरक्षा प्रतिष्ठान के प्रमुखों और वरिष्ठ सैन्य कमांडरों ने हिस्सा लिया था।
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का प्रभाव काफी बढ़ गया है। इस पूरी प्रक्रिया में अहमद वहिदी, SNSC सचिव मोहसिन रजाई और चीफ ऑफ स्टाफ अली अब्दुल्लाही जैसे कमांडरों की केंद्रीय भूमिका रही है। प्रशासनिक बदलावों के बावजूद नेतृत्व ने 'अधिकतम निवारण' (maximum deterrence) की नीति पर जोर देना जारी रखा है।
सैन्य कमांडरों ने सर्वोच्च नेता को फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में रक्षा तैयारियों की जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि घरेलू स्तर पर हथियारों और गोला-बारूद का उत्पादन बढ़ा दिया गया है।
राजनयिक मोर्चे पर राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने पुष्टि की है कि मोजतबा खामेनेई ने सरकार को विशेष अधिकार दिए हैं। इन अधिकारों का उद्देश्य अमेरिका के साथ चल रहे संघर्ष को समाप्त करने के लिए बातचीत को आसान बनाना है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची समुद्री सुरक्षा के मुद्दे पर कतर, ओमान और सऊदी अरब के समकक्षों के साथ तालमेल बिठा रहे हैं।
5 नवंबर 2026 को सर्वोच्च नेता के कार्यालय से जारी आधिकारिक बयान में अमेरिकी मध्यावधि चुनाव परिणामों के प्रभाव को खारिज कर दिया गया। बयान में कहा गया कि इन परिणामों से तेहरान के प्रति वाशिंगटन के शत्रुतापूर्ण दृष्टिकोण में कोई बदलाव नहीं आएगा। नेतृत्व ने शांति के लिए रियायतों पर भरोसा न करने की चेतावनी भी दी है।
इस बीच, कतर के मध्यस्थों को उम्मीद है कि अगले 36 घंटों के भीतर ईरानी और अमेरिकी वार्ताकारों से नए शांति प्रस्तावों पर प्रतिक्रिया मिल जाएगी।