सऊदी अरब में बनी नई समुद्री रक्षा गठबंधन, पाकिस्तान के कमोडोर रशीद शेख बने डिप्टी कमांडर.

Sushma Kumari2 September 20262 min read20 viewsSaudi
सऊदी अरब में बनी नई समुद्री रक्षा गठबंधन, पाकिस्तान के कमोडोर रशीद शेख बने डिप्टी कमांडर.

अंतर्राष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा और व्यापार को सुरक्षित रखने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। सऊदी अरब की राजधानी रियाद से मल्टीनेशनल मैरीटाइम डिफेंस कोएलिशन ने अपने ऑपरेशन की आधिकारिक शुरुआत कर दी है। इस गठबंधन के सक्रिय होने के साथ ही पाकिस्तान के Commodore Rashid Sheikh ने आधिकारिक तौर पर डिप्टी कमांडर के रूप में अपना पद संभाल लिया है। सऊदी न्यूज की घोषणा के अनुसार यह बदलाव 2 सितंबर 2026 को लागू हुआ है।

गठबंधन का कमांड ढांचा और सदस्य देश

इस सुरक्षा गठबंधन की नींव अगस्त 2026 के मध्य में रखी गई थी। सऊदी अरब ने जुलाई 2026 में 43 देशों के प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक के बाद इस गठबंधन का ऐलान किया था। इसका मुख्य उद्देश्य लाल सागर, बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य और अदन की खाड़ी जैसे महत्वपूर्ण जलमार्गों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों की रक्षा करना है। इस गठबंधन के कमांड स्ट्रक्चर के तहत सऊदी अरब के रियर एडमिरल Abdullah bin Salem Al-Shehri को 6 अगस्त 2026 को कमांडर नियुक्त किया गया था।

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वर्तमान में इस गठबंधन में कुल 15 देश शामिल हैं जिन्होंने संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर किए हैं। इनमें से 13 देशों ने सदस्यता के लिए अपनी घरेलू प्रक्रियाओं को पूरा कर लिया है। शामिल होने वाले प्रमुख देशों में Saudi Arabia, Kuwait, Bahrain, Qatar, Pakistan, Turkey, Egypt, Jordan, Yemen, Bangladesh, Sudan, Djibouti, Somalia और Nigeria का नाम शामिल है। यह गठबंधन पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत काम करेगा और इसका मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों की संप्रभुता और नेविगेशन की स्वतंत्रता की रक्षा करना है।

जेद्दा में हुई थी महत्वपूर्ण बैठक

इस बड़े रक्षा अभियान को शुरू करने से पहले कई दौर की बैठकें हुईं। जेद्दा स्थित वेस्टर्न फ्लीट कमांड में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें अधिकारियों ने संगठन के कामकाज के तौर-तरीकों और आधिकारिक लोगो को अंतिम रूप दिया था। कमांड से जुड़े अधिकारी अब समुद्री और खुफिया अभियानों को आपस में जोड़ रहे हैं ताकि गठबंधन की सामूहिक तैयारी को और अधिक मजबूत किया जा सके। यह गठबंधन भविष्य में अन्य देशों के लिए भी खुला रहेगा जो इसमें शामिल होना चाहते हैं।

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