NALCO और EGA की बड़ी पार्टनरशिप, ओडिशा में एल्युमिनियम स्मेल्टर के विस्तार के लिए हुआ समझौता.

नेशनल एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड यानी NALCO ने ओडिशा में अपने प्लांट के लिए यूएई की जानी-मानी कंपनी Emirates Global Aluminium (EGA) के साथ एक बहुत बड़ा समझौता किया है। इस नई पार्टनरशिप का मुख्य उद्देश्य साल 2030 के अंत तक अंगुल साइट पर 500,000 टन का ब्राउनफील्ड विस्तार पूरा करना है, जिससे कंपनी के काम करने का तरीका और उत्पादन क्षमता दोनों में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।
टेक्निकल एग्रीमेंट और तकनीक की खासियत
आधिकारिक EGA press release के अनुसार, इस डील के तहत EGA कंपनी को रिडक्शन सेल डिजाइन प्रदान करेगी, विकास कार्य के दौरान एक्सपर्ट्स की देखरेख सुनिश्चित करेगी और नए उपकरणों को चलाने के लिए NALCO के कर्मचारियों को विशेष रूप से ट्रेनिंग देगी। NALCO ने एक लंबी और कड़ी प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के बाद इस आधुनिक तकनीक को चुना है। प्राइमरी एल्युमिनियम के उत्पादन में धातु को ऑक्सीजन से अलग करने के लिए भारी मात्रा में इलेक्ट्रिक करंट की जरूरत होती है और डीएक्स प्लस अल्ट्रा सिस्टम हाई एम्पेयर प्रक्रिया का उपयोग करता है जिससे चुंबकीय स्थिरता यानी मैग्नेटिक स्टेबिलिटी को बनाए रखते हुए उत्पादन में भारी बढ़ोतरी की जा सके। जानकारी के अनुसार, इससे पहले Aluminium Bahrain ने भी साल 2018 में अपनी लाइन 6 विस्तार परियोजना के लिए इसी तकनीक को अपनाया था।
उत्पादन के बड़े लक्ष्य और रिपोर्ट
इस नई परियोजना के शुरू होने से NALCO का उत्पादन मौजूदा वॉल्यूम से दोगुने से भी ज्यादा हो जाएगा। कंपनी की FY2025-26 annual report के रिकॉर्ड बताते हैं कि उन्होंने पिछले साल कुल 471,701 टन एल्युमिनियम का उत्पादन किया था। अब इस प्लांट में 500,000 टन की अतिरिक्त क्षमता जुड़ जाने के बाद कंपनी का कुल उत्पादन लगभग एक मिलियन टन के आंकड़े के बहुत करीब पहुंच जाएगा, जो देश के मेटल सेक्टर के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि साबित होगी।
पावर और फ्यूल सप्लाई का नया प्लान
इस भारी-भरकम उत्पादन के लिए बिजली की जरूरत को पूरा करने हेतु, पिछले साल 8 जुलाई 2026 को NALCO और NLC India ने मिलकर एक 1,080 MW का कोयला आधारित कैप्टिव पावर प्लांट बनाने के लिए एक संयुक्त उद्यम यानी ज्वाइंट वेंचर साइन किया है। एक आधिकारिक exchange filing से यह पुष्टि होती है कि यह 50:50 की ओनरशिप स्ट्रक्चर वाला प्रोजेक्ट होगा। इस योजना में 25 साल का एक लंबा पावर परचेस एग्रीमेंट भी शामिल है जिसके तहत NALCO इस प्लांट से पैदा होने वाली पूरी बिजली का खुद उपभोग करेगा। इसके अलावा, NLC India इस स्टेशन के लिए कोयले की सप्लाई को भी संभालेगा, जिसमें मुख्य रूप से मच्छाकटा खदान का उपयोग किए जाने की संभावना है।
स्ट्रैटेजिक कारण और वैश्विक बाजार की स्थिति
मंत्रालय के विजन डॉक्यूमेंट यानी Ministry of Mines vision document के अनुमानों के मुताबिक, भारत को साल 2030 तक लगभग 1.6 मिलियन टन की प्राइमरी एल्युमिनियम क्षमता की कमी का सामना करना पड़ सकता है। आज के समय में परिवहन यानी ट्रांसपोर्ट, रक्षा यानी डिफेंस और इलेक्ट्रिक वाहन यानी ईवी सेक्टर में एल्युमिनियम की मांग तेजी से बढ़ रही है। NALCO के चेयरमैन ब्रिजेंद्र प्रताप सिंह और EGA के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अब्दुलनासिर बिन कल्बान ने Business Standard की रिपोर्ट के मुताबिक दुबई में एक हालिया स्टेट इन्वेस्टमेंट आउटरीच प्रोग्राम के दौरान इस महत्वपूर्ण तकनीकी सौदे को औपचारिक रूप दिया।
प्रोजेक्ट से जुड़े जोखिम और चुनौतियां
इस बड़ी परियोजना की सफलता आगे आने वाले कई अहम मील के पत्थरों पर पूरी तरह से निर्भर करती है, जिसके लिए कंपनी को बहुत सावधानी से काम करना होगा। इन मुख्य बातों में प्रोजेक्ट की अंतिम पूंजी लागत और फाइनेंसिंग संरचना को मंजूरी देना, सभी बकाया पर्यावरण और पानी से जुड़ी मंजूरियों को सुरक्षित करना, ऊर्जा की खपत और सेल के जीवन की परफॉर्मेंस का सत्यापन करना, और पावर ग्रिड तथा कोयला आपूर्ति श्रृंखलाओं का सफल सिंक्रनाइज़ेशन शामिल है।
कार्बन कॉम्पिटिटिवनेस और भविष्य की राह
कोयला आधारित बिजली पर मौजूदा निर्भरता इस प्लांट के लिए लंबे समय तक एक बड़ी चुनौती बनी रह सकती है। भले ही स्मेल्टिंग तकनीक ऊर्जा के मामले में काफी कुशल है, लेकिन तैयार धातु का कार्बन उत्सर्जन प्रोफाइल सीधे तौर पर बिजली के स्रोत से जुड़ा हुआ है। भविष्य में अंतरराष्ट्रीय निर्यात बाजार कार्बन बॉर्डर मैकेनिज्म लागू कर सकते हैं, जो इस तरह से उत्पादित एल्युमिनियम की लागत और बाजार तक पहुंच को बहुत हद तक प्रभावित कर सकता है। अब प्रबंधन को विस्तृत इंजीनियरिंग और साइट की तैयारी के चरण में आगे बढ़ना होगा, और बोर्ड की स्वीकृतियों तथा पावर प्लांट के निर्माण कार्य पर नजर रखकर इस पूरी प्रगति का आकलन किया जा सकता है।