नासा ने लॉन्च किया रोमन स्पेस टेलीस्कोप, ब्रह्मांड के बड़े रहस्यों की करेगा पड़ताल

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने ब्रह्मांड के सबसे बड़े और अब तक अनसुलझे रहस्यों की पड़ताल के लिए रविवार को अपने नए प्रमुख अंतरिक्ष वेधशाला मिशन नैंसी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में भेज दिया है। इस बड़े और महत्वपूर्ण मिशन को फ्लोरिडा स्थित कैनेडी स्पेस सेंटर से स्पेसएक्स के फॉल्कन हेवी रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष में रवाना किया गया जिस पर कुल लागत करीब चार अरब डॉलर आई है। अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में इस लॉन्च को एक बहुत बड़ी सफलता माना जा रहा है क्योंकि इसके जरिए उन रहस्यों से पर्दा उठने की उम्मीद है जो अब तक इंसानों की पहुंच से कोसों दूर थे।
ब्रह्मांड के रहस्यों की खुलेगी परतें
यह नया रोमन टेलीस्कोप मुख्य रूप से डार्क एनर्जी और डार्क मैटर जैसे जटिल ब्रह्मांडीय रहस्यों को बेहद बारीकी से समझने का काम करेगा। इसके साथ ही यह अंतरिक्ष में विशाल पैमाने पर गुरुत्वाकर्षण का भी गहराई से अध्ययन करेगा। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह आधुनिक यंत्र हमारे सौरमंडल के बाहर मौजूद ग्रहों यानी एक्सोप्लैनेट की खोज करने में भी बहुत ही अहम भूमिका निभाएगा। अंतरिक्ष की दुनिया में चल रही खोजों को यह टेलीस्कोप एक नई रफ्तार देगा जिससे आने वाले समय में कई बड़े खुलासे हो सकते हैं।
पृथ्वी से 16 लाख किलोमीटर दूर बनेगी कक्षा
इस आधुनिक अंतरिक्ष टेलीस्कोप को पृथ्वी से करीब 16 लाख किलोमीटर दूर स्थित लैग्रेंज प्वाइंट-2 की कक्षा तक पहुंचना है जहाँ यह स्थापित होकर अपना काम शुरू करेगा। इस पूरे मिशन की शुरुआती कार्यावधि पांच साल तय की गई है लेकिन अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का यह मानना है कि अगर अंतरिक्ष में पर्याप्त ईंधन बचा रहा तो इसकी मियाद और आगे बढ़ाई जा सकती है। इतने लंबे समय तक अंतरिक्ष में सक्रिय रहने से वैज्ञानिकों को लगातार नई और सटीक जानकारियां मिलती रहेंगी।
विशाल वाइड-एंगल व्यू और त्रि-आयामी मानचित्र
इस टेलीस्कोप की सबसे बड़ी और खास विशेषता इसका बेहद विशाल वाइड-एंगल व्यू है जो इसे बाकियों से अलग बनाता है। जहां पहले से मौजूद जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप ब्रह्मांड की गहराइयों में जाकर दूरस्थ पिंडों को बेहद बारीकी से देखता है, वहीं यह नया रोमन टेलीस्कोप एक ही समय में आकाश के बहुत बड़े हिस्से का सर्वे करने की क्षमता रखता है। नासा द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इसकी मदद से अब तक का सबसे व्यापक त्रि-आयामी ब्रह्मांडीय मानचित्र तैयार किया जाएगा जिसमें कुल दो अरब से अधिक आकाशगंगाओं का विस्तृत अध्ययन शामिल होगा।