ईरान के परमाणु खतरे को रोकने के लिए अमेरिका का साथ जरूरी: नाटो प्रमुख

नाटो (NATO) के महासचिव मार्क रुट्टे ने ईरान की परमाणु क्षमताओं को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण बयान दिया है। ब्रसेल्स में आयोजित 'यूरोन्यूज डिफेंस एंड स्पेस समिट' के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान के परमाणु खतरे को बेअसर करने के लिए अमेरिका की भूमिका सबसे निर्णायक है। रुट्टे का मानना है कि हालांकि यूरोप को ऐतिहासिक रूप से इस मुद्दे पर सक्रिय होना चाहिए था, लेकिन वर्तमान में केवल अमेरिका ही वह शक्ति है जो इस खतरे से निपटने में सक्षम है।
अमेरिका की भूमिका को बताया 'अत्यंत आवश्यक'
मार्क रुट्टे ने अपने साक्षात्कार में कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा ईरान की परमाणु क्षमता को कम करने की दिशा में उठाए गए कदम बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नाटो के सभी सदस्य देशों को एकजुट होकर यह सुनिश्चित करना होगा कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल न कर सके।
रुट्टे का यह रुख पहले भी देखने को मिल चुका है। इससे पहले जुलाई 2026 में अंकारा में हुए नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान भी उन्होंने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को 'अत्यंत आवश्यक' बताया था।
'नाटो 3.0' का नया विजन और सुरक्षा रणनीति
ब्रसेल्स शिखर सम्मेलन में रुट्टे ने भविष्य की सुरक्षा रणनीति, जिसे उन्होंने "नाटो 3.0" का नाम दिया है, पर भी चर्चा की। इस नए विजन के तहत कुछ मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- बढ़ती जिम्मेदारी: कनाडा और यूरोपीय देशों को अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद उठाने के लिए अधिक सक्रिय होना होगा।
- ट्रांसअटलांटिक गठबंधन: सुरक्षा की जिम्मेदारी बढ़ने के बावजूद अमेरिका और यूरोप के बीच का गठबंधन मजबूत बना रहेगा।
- रक्षात्मक स्वरूप: रुट्टे ने रूस द्वारा कलिनिनग्राद को लेकर दी गई परमाणु धमकियों को खारिज करते हुए कहा कि नाटो एक रक्षात्मक संगठन है और उसे तत्काल कोई खतरा नहीं है।
क्षेत्रीय संघर्षों का वैश्विक प्रभाव
मार्क रुट्टे ने इस बात की ओर भी ध्यान आकर्षित किया कि ईरान में चल रहे संघर्ष का असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि ईरान के संकट का "यूक्रेन पर भी असर" पड़ रहा है। इसके अलावा, तेल रिफाइनरियों पर हमलों और ऊर्जा की बढ़ती कीमतों को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति की चिंताओं का भी जिक्र किया गया, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा संकेत है।