सऊदी अरब पर हमला तय था? नवाफ़ ओबैद का विश्लेषण

सऊदी अरब: सऊदी अरब पर हाल में हुए हमले को किंग्स कॉलेज लंदन के वरिष्ठ रिसर्च फ़ेलो नवाफ़ ओबैद ने अपेक्षित घटनाक्रम बताया है। 11 अक्टूबर 2026 को अल जज़ीरा इंग्लिश से बातचीत में उन्होंने कहा कि कई दिनों तक सऊदी नेतृत्व वाले हवाई हमलों के बाद ऐसी प्रतिक्रिया लगभग तय मानी जा रही थी।
ओबैद के मुताबिक़ सऊदी अरब जैसे बड़े आकार वाले देशों की सुरक्षा में एक जैसी कमज़ोरियाँ होती हैं। उनका कहना है कि कितनी भी परतों वाली और आधुनिक हवाई रक्षा प्रणाली हो, कभी-कभार कोई सेंध लग सकती है। यानी किसी एक हमले को पूरी सुरक्षा व्यवस्था की नाकामी मान लेना सही नहीं होगा।
यह विश्लेषण ऐसे समय आया है जब इलाक़े में सैन्य गतिविधियाँ काफ़ी बढ़ी हुई हैं। ओबैद पिछले कुछ हफ़्तों से इस संघर्ष पर लगातार टिप्पणी कर रहे हैं। 20 सितंबर 2026 को उन्होंने कहा था कि यमन से चल रहे हूती हमलों का जवाब सऊदी अरब थल, जल और वायु सेना के साथ एक "बड़े, क्रमबद्ध सैन्य अभियान" के रूप में दे सकता है। उसी समय उन्होंने यह भी बताया था कि लाल सागर की सुरक्षा के लिए मिस्र और तुर्की युद्धपोत और हथियार प्रणालियाँ दे रहे हैं।
ओबैद का ज़ोर "मक्का डिफ़ेंस एलायंस" पर भी रहा है। यह सुरक्षा समझौता 7 अगस्त 2026 को सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच हुआ था। 5 अक्टूबर 2026 को उन्होंने इस गठबंधन की सक्रियता को अपेक्षित कदम बताया था, जो हूती संगठन की अपनी स्थिति बनाए रखने की क्षमता को चुनौती देगा। 6 अक्टूबर 2026 को उन्होंने कहा कि ईरान के साथ चल रहे टकराव के संदर्भ में यह गठबंधन क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे में बड़ा बदलाव है।
इसी बीच ओबैद ने एक और बात पर ज़ोर दिया है। उनका मानना है कि सऊदी अरब और ईरान के बीच सीधी जंग की संभावना कम है, क्योंकि तेहरान पर राजनीतिक, आर्थिक और सैन्य, तीनों तरह की सीमाएँ हैं। हालाँकि इलाक़े के हालात जिस तेज़ी से बदल रहे हैं, उनमें आगे की तस्वीर पर अभी कुछ भी पक्के तौर पर कहना मुश्किल है।