दक्षिणी लेबनान के लिए नवाब सलाम की दो टूक, इस्राइली हमलों के बीच जताई प्रतिबद्धता

लेबनान के प्रधानमंत्री नवाब सलाम ने हाल ही में दक्षिणी लेबनान के नबातीह क्षेत्र का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि देश को किसी व्यापक क्षेत्रीय शांति समझौते का इंतजार नहीं करना चाहिए, क्योंकि ऐसा समझौता कभी आ भी सकता है और नहीं भी, या फिर यह लेबनान की कीमत पर भी हो सकता है। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य इस्राइली सैन्य हमलों और गोलाबारी के बीच वहां के हालात का जायजा लेना और स्थानीय नागरिकों का हौसला बढ़ाना था।
क्षेत्रीय दौरे और मंत्रियों की मौजूदगी
अपने इस महत्वपूर्ण दौरे के दौरान प्रधानमंत्री के साथ आंतरिक मंत्री अहमद हज्जार और वित्त मंत्री यासिन जाबेर भी मौजूद थे। प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि सरकार दक्षिणी लेबनान से इस्राइली सेना की पूर्ण वापसी सुनिश्चित करने और युद्ध से तबाह हुए क्षेत्रों के पुनर्निर्माण के लिए अपने सभी उपलब्ध संसाधनों का पूरा इस्तेमाल करेगी। उन्होंने विशेष रूप से जेंडरमेरी इकाइयों की सराहना की, जो मुश्किल हालातों में भी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में जुटी हुई हैं।
प्रमुख प्राथमिकताएं और विस्थापितों की वापसी
प्रधानमंत्री नवाब सलाम ने इस बात पर जोर दिया कि लेबनान की तत्काल प्राथमिकताओं में शामिल हैं:
- इस्राइली आक्रामकता को तुरंत रोकना।
- लेबनानी क्षेत्र से इस्राइली सेना की पूरी तरह से वापसी।
- दस लाख से अधिक विस्थापित नागरिकों की उनके घरों में सुरक्षित वापसी।
- देशभर में सरकारी autoridad का विस्तार करना, ताकि युद्ध और शांति के फैसले केवल सरकारी संस्थाओं के हाथ में रहें।
चल रहा है संघर्ष और शांति प्रयासों की चुनौती
जमीनी स्तर पर हालात अभी भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। हाल ही में 'बफर जोन' और हेब्बारेह के बाहरी इलाकों में इस्राइली गोलीबारी और मंसूरी में एक बड़े विस्फोट की खबरें सामने आई हैं। जून में एक अमेरिकी ब्रोकरेज फ्रेमवर्क पर सहमति बनने के बावजूद, शांति प्रक्रिया की गति धीमी रही है और इस्राइल ने अभी तक केवल एक ही निर्धारित 'पायलट जोन' से अपनी वापसी की है। इन तमाम चुनौतियों के बीच, सरकार जल्द ही रोम में होने वाली आगामी बैठकों के जरिए शांति समझौते को लागू करने के लिए एक स्पष्ट समयसीमा और सत्यापन तंत्र की तलाश में जुटी हुई है।