नेपाल में भीषण बाढ़ का कहर, भारत और चीन की रेस्क्यू टीमें नेपाल आर्मी के साथ मिलकर चला रही हैं बचाव अभियान.

Nura Basta1 September 20262 min read35 viewsWorld
नेपाल में भीषण बाढ़ का कहर, भारत और चीन की रेस्क्यू टीमें नेपाल आर्मी के साथ मिलकर चला रही हैं बचाव अभियान.

नेपाल में आई भीषण भोटे कोशी नदी की बाढ़ के बाद राहत और बचाव कार्य बहुत तेजी से चल रहा है। इस आपदा से निपटने के लिए भारत और चीन की विशेष सुरंग बचाव टीमें मौके पर पहुंच गई हैं। नेपाल के विदेश मंत्रालय के आधिकारिक बयान के अनुसार, इस अभियान में कुल 21,000 नेपाल आर्मी और पुलिस के जवान शामिल किए गए हैं। यह सभी मिलकर बाढ़ से प्रभावित हाइड्रोपावर साइटों पर फंसे लोगों को निकालने और मलबे को हटाने का काम कर रहे हैं। इस भयंकर आपदा की शुरुआत 26 अगस्त 2026 को हुई थी, जिसने पूरे इलाके में भारी तबाही मचाई है।

कहा-कहा चल रहा है बचाव अभियान और कितना है नुकसान

अंतरराष्ट्रीय टीमों और स्थानीय सुरक्षा बलों की यह संयुक्त तैनाती कई प्रमुख हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स पर फोकस कर रही है। इसमें अपर त्रिशूली-I, अपर त्रिशूली-III बी, माइलुंग खोला, रसुवागढी, त्रिशूली और देवीघाट जैसी परियोजनाएं शामिल हैं। 1 सितंबर 2026 के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस आपदा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,010 हो गई है। इसके अलावा करीब 4,000 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में 39 देशों के 590 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं, जिससे स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। सुरक्षा बलों ने अब तक 11,800 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है, लेकिन तलाश का काम अभी भी युद्ध स्तर पर जारी है।

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विदेशी टीमों का योगदान और राहत सामग्री

भारत की तरफ से एक 24 सदस्यीय सुरंग बचाव टीम चिलिमे और लांगतांग साइटों पर लगातार काम कर रही है। इस भारतीय दल का साथ देने के लिए एक 11 सदस्यीय मेडिकल और टनल रेस्क्यू स्क्वाड भी तैनात किया गया है। इसके साथ ही, चीन की एक 9 सदस्यीय टीम अपर त्रिशूली 3ए साइट पर राहत कार्यों में जुटी हुई है। कोरिया गणराज्य (रिपब्लिक ऑफ कोरिया) के विशेष विशेषज्ञ भी इस आपदा प्रभावित क्षेत्र में राहत कार्यों में मदद कर रहे हैं। नेपाल सरकार ने इस बारे में जानकारी अपनी आधिकारिक वेबसाइट नेपाल विदेश मंत्रालय प्रेस ब्रीफिंग के जरिए साझा की है।

आपदा का कारण और सरकारी कदम

प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि यह भयंकर बाढ़ तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र से ग्लेशियर के टूटने और अचानक पानी का स्तर बढ़ने के कारण आई थी। इस पानी के तेज बहाव में प्रसिद्ध मितेरी पुल भी पूरी तरह से नष्ट हो गया। हालात की गंभीरता को देखते हुए नेपाल सरकार ने 15 नगर पालिकाओं को तीन महीने के लिए आपदा संकट-प्रभावित क्षेत्र घोषित कर दिया है। सरकार संयुक्त राष्ट्र अमेरिका, जापान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे देशों के साथ मिलकर राहत कार्यों का समन्वय कर रही है। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनराल ने ग्लोबल वार्मिंग को इस आपदा का मुख्य कारण बताया है और इसके लिए जलवायु मुआवजे की सख्त आवश्यकता पर जोर दिया है, क्योंकि इससे नेपाल को बहुत बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है।

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