नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़, पानी की रफ्तार 188 किलोमीटर प्रति घंटा थी

पड़ोसी देश नेपाल से एक बहुत बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। तिब्बत से होते हुए नेपाल के रसुवा जिले की भोटेकोशी नदी में जो विनाशकारी बाढ़ आई थी, उसकी रफ्तार को लेकर वैज्ञानिकों ने एक नया और बड़ा दावा किया है। दुनिया भर के मौसम पर नजर रखने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन (डब्लूडब्लूए) के वैज्ञानिकों ने बताया है कि इस बाढ़ की औसत गति करीब 188 किलोमीटर प्रति घंटा थी। आम बोलचाल में कहें तो पानी और मलबे का यह सैलाब किसी तेज रफ्तार ट्रेन की तरह तबाही मचाते हुए नीचे आया था। इस खतरनाक आपदा में नेपाल के कई जिलों में भारी नुकसान हुआ है और हजारों लोगों की जिंदगी पर संकट आ गया है।
वैज्ञानिकों के अध्ययन में क्या आया सामने
इससे पहले नेपाल के स्थानीय बाढ़ विशेषज्ञों ने शुरुआती अनुमान लगाया था कि बाढ़ की गति लगभग 55 किलोमीटर प्रति घंटा हो सकती है। उस समय इसे नेपाल के इतिहास की सबसे तेज बाढ़ माना जा रहा था। लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर के 20 से अधिक वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने जब इस घटना का गहराई से अध्ययन किया, तो आंकड़े इसके मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा निकले। इस रिसर्च टीम में बेन क्लार्क, मरियम जकारिया, बेथान डेविस, रेजिन हक और वाल्टर इम्मरजिल जैसे कई जाने-माने विशेषज्ञ शामिल थे, जिन्होंने मिलकर इस पूरी घटना की सच्चाई देश और दुनिया के सामने रखी है।
ऐसे बना तबाही का खतरनाक माहौल
वैज्ञानिकों की रिपोर्ट के मुताबिक, यह पूरी घटना 26 अगस्त को शुरू हुई थी। रसुवा के लांगटांग लिरुंग हिमाल में 5,150 मीटर से भी ज्यादा अधिक ऊंचाई पर स्थित एक बहुत बड़ा चट्टानी हिस्सा अचानक टूटकर नीचे आ गिरा। इस चट्टान के साथ ऊपर मौजूद ग्लेशियर का एक बड़ा हिस्सा भी नीचे धंस गया। जब इतनी भारी मात्रा में बर्फ, पत्थर और चट्टानें एक साथ नीचे गिरीं, तो वह पानी और मिट्टी के साथ मिलकर एक भयानक मलबे में बदल गईं। जब यह मलबा ल्हेन्दे खोला तक पहुंचा, तब तक यह एक भयंकर बाढ़ का रूप ले चुका था।
सिर्फ 7 मिनट में तय की 22 किलोमीटर की दूरी
इस बाढ़ की रफ्तार इतनी ज्यादा भयानक थी कि उसने लांगटांग क्षेत्र से लेकर रसुवागढ़ी सीमा क्षेत्र तक की करीब 22 किलोमीटर की दूरी महज 7 मिनट में ही पूरी कर ली। वैज्ञानिकों का कहना है कि नेपाल की नदियों के इतिहास में इतनी डरावनी और तेज रफ्तार का उदाहरण पहले कभी नहीं देखा गया था। यही मलबा और पानी का तेज बहाव भोटेकोशी नदी में पहुंचा और निचले इलाकों में भारी तबाही का कारण बन गया।
पांच जिलों में मचा हाहाकार और भारी तबाही
हिम चट्टानों और मलबे का यह सैलाब भोटेकोशी से होता हुआ आगे चलकर त्रिशूली नदी तक जा पहुंचा। इस दौरान रास्ते में पड़ने वाले रसुवा, नुवाकोट और धादिङ सहित कुल पांच जिलों के 15 स्थानीय इलाकों में भारी तबाही देखने को मिली। इस भीषण आपदा में अब तक 1,400 से अधिक लोगों की मौत की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है, जबकि लगभग 6,000 लोग लापता बताए जा रहे हैं। इसके अलावा अरबों रुपये की सरकारी और निजी संपत्तियां पूरी तरह से नष्ट हो चुकी हैं। तेज बहाव के कारण टिमुरे, स्याफ्रुबेँसी, मैलुङ, बेत्रावती, सोले, तुप्चे, भैंसे, त्रिशूली ढुंगे और देवीघाट जैसे कई इलाकों में बड़े पैमाने पर जमीन कट गई और सब कुछ तबाह हो गया।
7 घंटे से भी कम समय में देवघाट पहुंचा पानी
वैज्ञानिकों के अध्ययन से यह भी पता चला कि बाढ़ का यह पानी सिर्फ 7 घंटे से भी कम समय में अपनी जगह से करीब 200 किलोमीटर दूर चितवन के देवघाट तक पहुंच गया था। देवघाट में नदी का जलस्तर बढ़कर प्रति सेकंड लगभग 5,850 घनमीटर तक पहुंच गया था। रिपोर्ट के अनुसार, चार घंटे से भी कम समय में लगभग 2 करोड़ घनमीटर अतिरिक्त पानी नदी में बह गया। इसके साथ ही करीब 3 करोड़ 5 लाख घनमीटर मिट्टी, पत्थर और अन्य मलबा भी पानी के साथ बहकर अलग-अलग जगहों पर जमा हो गया, जिससे आसपास के इलाकों में बर्बादी का दायरा और ज्यादा बढ़ गया।