नेपाल में बुढ़ी गंडकी में अचानक बाढ़, गोरखा में भारी तबाही

नेपाल के गोरखा जिले से: 11 अक्टूबर 2026 की सुबह बुढ़ी गंडकी नदी में अचानक आई बाढ़ ने इलाके में ऐसी तबाही मचाई कि लोग अपने घर छोड़कर ऊंची जगहों की ओर भागने को मजबूर हो गए। गोरखा जिले के चुमनुब्री और धरचे ग्रामीण नगरपालिकाओं में सबसे ज़्यादा नुकसान हुआ है। नदी के पानी के साथ भारी मात्रा में मिट्टी, बड़े पत्थर और मलबा बहकर आया, जिसने बस्तियों को रौंद दिया।
अब तक के अनुमान के मुताबिक़ 35 से 40 घर पूरी तरह तबाह हो गए हैं, और यह संख्या 100 तक पहुंच सकती है, ऐसी आशंका जताई जा रही है। चार लोगों के लापता होने की ख़बर है। बचाव और राहत का काम जारी है, लेकिन पानी का बहाव अब भी तेज़ बताया जा रहा है, जिससे खोजबीन में दिक्कत आ रही है।
पुल और सड़कें बह गईं
बाढ़ का सबसे बड़ा असर इलाके के संपर्क तंत्र पर पड़ा है। तीन बड़े पुल पूरी तरह नष्ट हो गए, जिनमें न्याकचेत और सिर्दिबास को जोड़ने वाला झूला पुल भी शामिल है। इसके अलावा क़रीब छह और पुलों को अलग-अलग स्तर का नुकसान हुआ है। कई सड़कें कट जाने से कई गांवों का बाहरी दुनिया से संपर्क टूट गया है।
एक पनबिजली परियोजना का बेस कैंप भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। मछाखोला के निचले हिस्से की बस्ती में पांच से सात घरों में पानी घुस गया, जबकि धरचे-3 के सल्लेरी इलाके में 20 से 22 घरों पर सीधा ख़तरा मंडरा रहा है। दोभान, घट्टेखोला और जगत जैसे इलाकों में भी असर देखा गया है।
बाढ़ की वजह की जांच चल रही है, लेकिन अधिकारियों को शक है कि उत्तर की ओर किसी बर्फ़ के तोदे (आइस एवलांच) के गिरने से अचानक इतना पानी और मलबा नीचे आया। नेपाल की राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) ने उच्च स्तरीय चेतावनी जारी करते हुए त्रिशूली दोभान तक नदी के किनारे न जाने और पानी उतरने तक सुरक्षित ऊंचाई पर चले जाने की अपील की है।
इस बाढ़ का असर सीमा पार भारत तक भी पहुंचा है। उत्तर प्रदेश में सिंचाई विभाग ने नेपाल के नवलपरासी जिले में स्थित बैराज को लेकर अलर्ट जारी किया है। सीमा से लगे महराजगंज और कुशीनगर जिलों में बाढ़ का ख़तरा बढ़ गया है। बिहार में भी गंडकी नदी प्रणाली में जलस्तर बढ़ने के बाद प्रशासन को सतर्क कर दिया गया है।
ग़ौरतलब है कि इस साल अगस्त में भी इलाके में भारी बाढ़ आई थी, जिसमें सड़कों, पुलों और बिजली परियोजनाओं को काफ़ी नुकसान हुआ था। ऐसे में लगातार दो बड़ी आपदाओं ने स्थानीय लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।