नेपाल-चीन सीमा पर बड़ा फैसला, पांच खतरनाक हिमतालों का होगा तकनीकी अध्ययन

नेपाल और चीन की सीमा पर स्थित संभावित खतरनाक हिमतालों से होने वाले जोखिम को कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक में बड़ा फैसला लिया गया है। चीन के ताक्लाकोट में हाल ही में संपन्न हुई इस स्थानीय अधिकारियों की उच्चस्तरीय बैठक के दौरान, चीनी भू-भाग में मौजूद पांच हिमतालों का तकनीकी अध्ययन कराने पर दोनों देशों के बीच पूर्ण सहमति बन गई है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं के खतरे को समय रहते भांपना और नेपाल की तरफ होने वाले संभावित नुकसान को रोकना है।
आपदा से बचाव के लिए तकनीकी अध्ययन जरूरी
हुम्ला के प्रमुख जिला अधिकारी भोला नाथ गुरागाईं ने इस बैठक की जानकारी देते हुए बताया कि दोनों पक्षों ने चीनी हिमालयी क्षेत्र में स्थित इन हिमतालों की मौजूदा स्थिति का जायजा लेने के लिए तकनीकी टीम भेजने का निर्णय लिया है। इसके लिए दोनों देश अपने-अपने संघीय यानी केंद्रीय स्तर की सरकारों के समक्ष औपचारिक पहल करेंगे। हाल ही में रसुवा की भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद से चीन की ओर से भी हिमतालों और प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम को लेकर गहरी चिंता जताई जा रही थी, जिसके बाद यह बैठक बुलाई गई थी।
संभावित हिमताल विस्फोट यानी जीएलओएफ या अन्य प्राकृतिक आपदाओं के कारण हुम्ला के हिल्सा और किट सीमा क्षेत्रों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। यही वजह है कि इन झीलों में पानी की मात्रा, उनके संभावित खतरों और पड़ने वाले प्रभावों का तकनीकी अध्ययन करना बेहद जरूरी हो गया है। बैठक के दौरान नेपाल की तरफ से चीनी भू-भाग में स्थित राक्षस ताल, मानसरोवर, गोंजुका, आबुका और सिरिमाल जैसी विभिन्न झीलों से जुड़ी अहम जानकारियां साझा की गईं।
सैटेलाइट तकनीक और सुरक्षा व्यवस्था पर चर्चा
बैठक में यह भी तय किया गया कि हिमतालों की स्थिति पर लगातार नजर रखने के लिए आधुनिक सैटेलाइट तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके अलावा, मौसम और हिमपात से जुड़ी सूचनाओं का समय पर आदान-प्रदान करने के साथ-साथ किसी भी खतरे की स्थिति में एक-दूसरे को तुरंत आगाह करने के लिए एक मजबूत प्रणाली विकसित करने पर भी मुहर लगी। नेपाल की तरफ से सीमा स्तंभों की स्थिति का मुद्दा भी उठाया गया, जिसमें बताया गया कि सीमा स्तंभ संख्या 6 के 2 हिस्से नेपाल की ओर और 7 के 1 व 2 हिस्से चीन की ओर आते हैं, जिनकी जल्द मरम्मत की आवश्यकता है।
व्यापार और आवागमन को सुगम बनाने के लिए सीमा क्षेत्र से आने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांचने हेतु क्वारंटीन व्यवस्था स्थापित करने पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि भविष्य में सीमा पास की प्रक्रिया को और अधिक आसान बनाते हुए इसे पूरी तरह से डिजिटल प्रणाली में बदला जा सकता है, जिस पर चीनी पक्ष ने भी सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। इसके अलावा, सीमावर्ती इलाकों में साल में एक बार लगने वाले हाट-बाजार को व्यवस्थित करने और लगभग 30 किलोमीटर के दायरे में व्यापारिक गतिविधियों के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने पर भी बात हुई।
सड़क निर्माण और स्थानीय स्तर के समाधान
बैठक में हिल्सा-सिमकोट सड़क निर्माण के कार्य को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाने का मुद्दा उठाया गया। इस सड़क को चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव यानी बीआरआई योजना के तहत आगे बढ़ाने की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया। इस बैठक में बझांग के प्रमुख जिला अधिकारी मुकेश केसरी समेत बझांग, दार्चुला और हुम्ला जिलों के सीमावर्ती स्थानीय निकायों के प्रमुख, प्रशासनिक अधिकारी और सुरक्षा एजेंसियों के बड़े अधिकारी शामिल हुए थे।
चीनी पक्ष ने नेपाल की ओर से उठाए गए मामलों में स्थानीय स्तर पर हल होने वाले विषयों को तुरंत लागू करने का आश्वासन दिया है, जबकि नीतिगत फैसलों से जुड़े मुद्दों को उच्च स्तर के अधिकारियों तक पहुंचाने की बात कही है। जरूरत पड़ने पर सीमा पर तैनात नेपाली सुरक्षाकर्मियों और स्थानीय नागरिकों के लिए ताक्लाकोट में मुफ्त या सुगम उपचार की व्यवस्था करने पर भी सकारात्मक चर्चा हुई। दोनों देशों के बीच जिला स्तर की इस बातचीत को नियमित बनाए रखने के लिए हुम्ला प्रशासन कार्यालय और ताक्लाकोट के अधिकारियों के बीच ईमेल के जरिए लगातार सूचनाओं का आदान-प्रदान शुरू कर दिया गया है।