नेपाल और चीन का बड़ा फैसला, ग्लेशियर टूटने से मची तबाही के बाद अब बाढ़ का डेटा किया जाएगा साझा।

Nura Basta31 August 20263 min read7 viewsWorld
नेपाल और चीन का बड़ा फैसला, ग्लेशियर टूटने से मची तबाही के बाद अब बाढ़ का डेटा किया जाएगा साझा।

नेपाल और चीन की सरकारों ने मिलकर बाढ़ के खतरों से निपटने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। नेपाल के विदेश मंत्री Shisir Khanal ने हाल ही में पुष्टि की है कि दोनों देश मिलकर एक मजबूत और रियल-टाइम डेटा शेयरिंग सिस्टम बनाने पर काम कर रहे हैं। यह फैसला 26 अगस्त 2026 को नेपाल-चीन सीमा के पास हुए एक भयानक ग्लेशियर टूटने की घटना के बाद लिया गया है, जिसकी वजह से इलाके में भयंकर बाढ़ आ गई थी और भारी तबाही देखने को मिली थी।

बाढ़ से हुआ भारी जानमाल का नुकसान

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 31 अगस्त तक नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) ने देश में 939 लोगों की मौत की आधिकारिक पुष्टि कर दी है। इसके अलावा, अभी भी 3,925 लोग लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश लगातार जारी है। वहीं दूसरी तरफ, चीन के ग्यारियोंग काउंटी में प्रशासन ने 16 लोगों की मौत और 546 लोगों के लापता होने की पुष्टि की है। इस तरह से इस पूरी आपदा में मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर 955 हो गई है और 4,471 लोग अभी भी लापता हैं।

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मंत्रियों के बीच हुई उच्च स्तरीय बातचीत

नेपाल के विदेश मंत्री Shisir Khanal ने सर्बिया की अपनी तय आधिकारिक यात्रा को बीच में ही रद्द कर दिया था ताकि वे देश में चल रहे राहत और बचाव कार्यों की खुद निगरानी कर सकें। उन्होंने 29 अगस्त को चीन के विदेश मंत्री Wang Yi के साथ खास बातचीत की थी। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य आपातकालीन राहत कार्यों को आपस में जोड़ना और समय पर हाइड्रोलॉजिकल डेटा का आदान-प्रदान करना था। हालांकि, नेपाली विदेश मंत्री ने यह भी माना कि इस तरह का रियल-टाइम डेटा शेयरिंग सिस्टम इस आपदा से पहले केवल शुरुआती दौर में ही था।

चीन और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की प्रतिक्रिया

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Guo Jiakun ने 31 अगस्त को एक बयान में बताया कि चीन ने पहले ही आपदा से जुड़ी तस्वीरें, सैटेलाइट डेटा और ऊपर की झीलों को लेकर शुरुआती चेतावनियां दे दी थीं। इसके साथ ही बीजिंग ने उन सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें यह कहा जा रहा था कि तिब्बत में चल रही जलविद्युत परियोजनाएं इस बाढ़ की वजह बनीं। चीन ने इसे पूरी तरह से फर्जी खबर बताया और कहा कि यह हादसा पूरी तरह से ऊंचाई पर स्थित ग्लेशियर के टूटने की वजह से हुआ है, जिसकी जानकारी Nepal MoFA की आधिकारिक वेबसाइट पर भी दी गई है।

राहत और बचाव कार्यों का छठा दिन

आपदा के बाद चलाए जा रहे खोज और बचाव अभियानों को 31 अगस्त को छठा दिन पूरा हो गया। इस दौरान कुल 10,451 लोगों को सुरक्षित बचाया जा चुका है, जिसमें से अकेले नेपाल सेना के विमानों की मदद से 3,344 लोगों को रेस्क्यू किया गया है। वहीं, भोटे कोशी और त्रिशूली नदी के इलाकों में लापता हुए जलविद्युत कर्मचारियों की संख्या अब घटकर 639 रह गई है। नेपाल सरकार ने चीन से औपचारिक तौर पर 30 बेली ब्रिज मांगे हैं ताकि टूटे हुए रास्तों को फिर से चालू किया जा सके। इसके अलावा सिंगापुर की तरफ से तकनीकी मानवीय सहायता भी दी जा रही है, जिसमें आपदा पीड़ित पहचान दल भी शामिल है जैसा कि Singapore MFA के बयान में बताया गया है। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के 27 अगस्त के सैटेलाइट फोटो से इस बात की पुष्टि होती है कि प्रभावित इलाके में पानी कितनी दूर तक फैला हुआ था, जिसकी जानकारी ESA Sentinel-2 रिपोर्ट में देखी जा सकती है। संयुक्त राष्ट्र के जलवायु प्रमुख Simon Steill ने इस घटना को पहाड़ी इलाकों की कमजोरी का एक बड़ा उदाहरण बताया है, जो जलवायु परिवर्तन के कारण और भी ज्यादा खतरनाक होती जा रही है। बचाव दल अभी भी खतरनाक सुरंगों और प्रभावित जगहों पर लगातार अपनी नजर बनाए हुए हैं।

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