नेपाल-चीन बॉर्डर पर बढ़ा व्यापार, रसुवागढ़ी बंद होने से कोरला नाके से हो रही है भारी आवाजाही.

Aanya14 September 20263 min read24 viewsWorld
नेपाल-चीन बॉर्डर पर बढ़ा व्यापार, रसुवागढ़ी बंद होने से कोरला नाके से हो रही है भारी आवाजाही.

नेपाल और चीन के बीच व्यापारिक गतिविधियों को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है जहां मुस्तांग जिले के कोरला-लिजी नाके पर पिछले दो हफ्तों से कारोबार में काफी तेजी देखी जा रही है। नेपाल और चीन के मुख्य व्यापारिक मार्ग के रूप में पहचान रखने वाला रसुवागढ़ी-केरुंग नाका पिछले 26 अगस्त से बाढ़ के कारण पूरी तरह से बंद चल रहा है। इस स्थिति के चलते चीन से आने वाले सामान का आयात अब पूरी तरह से इसी वैकल्पिक मार्ग के जरिए किया जा रहा है क्योंकि चीन ने फिलहाल तातोपानी नाका भी नहीं खोला है।

मुस्तांग कस्टम कार्यालय में बढ़ा वाहनों का दबाव

रसुवा में आई बाढ़ के बाद चीन से नेपाल आने वाले मालवाहक वाहनों का पूरा दबाव अब मुस्तांग कस्टम कार्यालय पर आ गया है जिसके कारण यहां रोजाना सैकड़ों गाड़ियों की जांच और क्लीयरेंस का काम तेजी से किया जा रहा है। मुस्तांग कस्टम कार्यालय से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार चीन से आने वाले सामान के साथ-साथ बड़ी संख्या में इलेक्ट्रिक वाहनों का आयात भी इसी रास्ते से हो रहा है जिससे बॉर्डर पर लगातार चहल-पहल बनी हुई है।

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मुस्तांग के कस्टम प्रमुख विदुर चुडाल ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि इन दिनों रोजाना करीब 60 से 70 वाहनों की भंसार जांच और पासिंग का काम किया जा रहा है। उन्होंने साफ तौर पर बताया कि ज्यादातर कंटेनर ऐसे हैं जिनमें आने वाले दशहरा के त्योहार को ध्यान में रखकर सामान मंगाया गया है। इसके अलावा देश के उद्योगों के लिए जरूरी कच्चा माल और कुछ खास प्रकार के फल भी इन्हीं रास्तों से नेपाल लाए जा रहे हैं।

कंटेनर और इलेक्ट्रिक वाहनों की क्लीयरेंस के आंकड़े

मुस्तांग कस्टम कार्यालय के आंकड़ों के मुताबिक अब तक कुल 482 कंटेनर भंसार जांच से पास हो चुके हैं। अगर तुलना की जाए तो 26 अगस्त से पहले यानी इसी साल जनवरी से लेकर 10 अगस्त तक केवल 133 कंटेनरों की ही जांच हो पाई थी, जबकि बाढ़ के बाद अकेले ही 349 कंटेनरों का क्लीयरेंस किया जा चुका है जो व्यापार में आई अचानक तेजी को साफ दिखाता है।

रसुवागढ़ी नाका बंद होने की वजह से केवल सामान्य सामान ही नहीं बल्कि इलेक्ट्रिक वाहन यानी ईवी भी अब इसी मुस्तांग के रास्ते नेपाल पहुंच रहे हैं। कस्टम प्रमुख विदुर चुडाल के अनुसार मुस्तांग भंसार से अब तक कुल 757 इलेक्ट्रिक वाहनों की जांच पूरी हो चुकी है। बाढ़ से पहले इस रास्ते से केवल 163 ईवी का ही क्लीयरेंस हुआ था जिसके बाद करीब 594 इलेक्ट्रिक वाहनों को मंजूरी दी गई है।

अधिकारियों का कहना है कि अभी भी नाके के आसपास करीब 300 से 400 इलेक्ट्रिक वाहन खड़े हैं जिनमें से कई गाड़ियों का कस्टम क्लीयरेंस होना अभी बाकी है। तातोपानी नाका बंद रहने के कारण आने वाले कुछ दिनों तक मुस्तांग के रास्ते ही इलेक्ट्रिक वाहनों के आने का दबाव ऐसे ही बने रहने की पूरी संभावना है और कस्टम विभाग इस सारे कामकाज को संभालने में पूरी ताकत से जुटा हुआ है।

राजस्व संग्रह में भारी बढ़ोतरी

रसुवागढ़ी नाका बंद होने के बाद मुस्तांग भंसार कार्यालय की कमाई यानी राजस्व संग्रह में भी बहुत बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कस्टम प्रमुख के अनुसार पिछले शनिवार तक इस कार्यालय में कुल एक अरब 87 करोड़ नेपाली रुपये का राजस्व जमा हो चुका था। इसके बाद रविवार को लगभग 13 करोड़ रुपये और जमा होने के बाद कुल सरकारी राजस्व का आंकड़ा लगभग 2 अरब रुपये के पास पहुंच गया है।

तुलना के तौर पर देखा जाए तो इस साल जनवरी से लेकर 26 अगस्त तक मुस्तांग कस्टम कार्यालय से केवल 53 करोड़ रुपये का ही राजस्व मिल पाया था। लेकिन बाढ़ के बाद कोरला को एक वैकल्पिक व्यापारिक रास्ते के रूप में इस्तेमाल किए जाने से बहुत कम समय के भीतर ही सरकार की तिजोरी में भारी रकम आई है। हालात यह हैं कि दो महीने भी पूरे नहीं हुए हैं और सरकार के पूरे साल के राजस्व लक्ष्य का लगभग एक-चौथाई हिस्सा इसी एक नाके से पहले ही जमा हो चुका है।

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