नेपाल में चीन के दबाव से राहत कार्यों में रुकावट, किसी भी देश की रेस्क्यू टीम को आने की नहीं मिल रही अनुमति.

Nura Basta28 August 20263 min read20 viewsWorld
नेपाल में चीन के दबाव से राहत कार्यों में रुकावट, किसी भी देश की रेस्क्यू टीम को आने की नहीं मिल रही अनुमति.

नेपाल में प्राकृतिक आपदा के बाद राहत और बचाव कार्यों को लेकर एक बड़ी बात सामने आई है। चीन के भारी दबाव की वजह से नेपाल सरकार किसी भी अन्य देश की रेस्क्यू टीम को देश के अंदर आने की अनुमति नहीं दे रही है। इस घटना के बाद से ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा शुरू हो गई है कि आखिर ऐसी कौन सी वजह है जिसके चलते नेपाल सरकार सहायता स्वीकार करने से पीछे हट रही है।

भारत की तरफ से आया था मदद का प्रस्ताव

इस बड़े हादसे के तुरंत बाद भारत सरकार ने सबसे पहले अपनी मदद का हाथ बढ़ाया था। भारत की तरफ से यह प्रस्ताव रखा गया था कि यदि नेपाल सरकार को आवश्यकता होती है, तो राहत और बचाव कार्यों के लिए एनडीआरएफ (NDRF) की टीम को तुरंत नेपाल भेजा जा सकता है। हालांकि, नेपाल के विदेश मंत्रालय की तरफ से यह साफ कह दिया गया कि भारत को इस तरह की किसी भी रेस्क्यू टीम को भेजने की कोई आवश्यकता नहीं है। नेपाल ने यह स्पष्ट किया कि वह राहत सामग्री को तो स्वीकार करेगा, लेकिन किसी भी बाहरी देश की बचाव टीम को फिलहाल देश की सीमा में आने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

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चीन सीमा से सटे इलाकों में भारी तबाही

प्राकृतिक आपदा के कारण नेपाल के जिन इलाकों में सबसे अधिक नुकसान हुआ है, वे सभी क्षेत्र चीन की सीमा से बिल्कुल सटे हुए हैं। सामने आई तस्वीरों और रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल और चीन की सीमा को आपस में जोड़ने वाला केरूंग नाका पूरी तरह से तबाह हो चुका है। वहां अब अंतरराष्ट्रीय सीमा जैसा कोई भी निशान बाकी नहीं बचा है। चीनी प्रशासन और वहां की सरकार को इस बात का लगातार डर सता रहा है कि यदि राहत और बचाव कार्य के नाम पर विदेशों से सैनिक या गुप्तचर अंदर आ गए, तो वे चीन की सीमा के पास जासूसी और निगरानी रख सकते हैं।

चीनी दूतावास का लगातार बना हुआ है दबाव

नेपाल के विदेश मंत्रालय के एक उच्च अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर यह जानकारी दी है कि जब से यह हादसा हुआ है, तब से लेकर अब तक चीनी दूतावास की तरफ से लगातार दबाव बनाया जा रहा है। चीनी पक्ष का यह कहना है कि किसी भी देश की सेना या रेस्क्यू टीम को रसुवा के सीमावर्ती इलाकों में बिल्कुल भी प्रवेश नहीं दिया जाना चाहिए। नेपाल के एक मंत्री ने भी इस बात पर हैरानी जताई है कि जहां एक तरफ भारत और अन्य देश प्राकृतिक आपदा के इस संकट में मदद का हाथ बढ़ा रहे हैं, वहीं चीन पहले मिनट से ही सिर्फ अपनी सीमा के आसपास के इलाकों में दूसरों को रोकने में लगा हुआ है।

पश्चिमी देशों और अमेरिका की रेस्क्यू टीमों को लेकर चिंता

चीन को भारत से भी ज्यादा चिंता अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों की रेस्क्यू टीमों को लेकर है। चीनी प्रशासन को ऐसा लगता है कि बचाव कार्य के नाम पर इन देशों की खुफिया एजेंसियां और सेना के लोग सीधे उनके सीमाई क्षेत्र तक पहुंच सकते हैं। इसी संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए नेपाल के विदेश मंत्रालय ने भारत सरकार से भी आग्रह किया है कि वे सीमाई क्षेत्रों की इस स्थिति को समझें। नेपाल सरकार ने फिलहाल सुरक्षा कारणों और कूटनीतिक दबाव के चलते बाहरी देशों के बचाव दलों को अपने यहां आने से रोक दिया है।

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