नेपाल-चीन सीमा पर बड़ा संकट, बाढ़ के बाद तातोपानी नाका भी बंद, व्यापार ठप.

Sushma Kumari16 September 20264 min read23 viewsWorld
नेपाल-चीन सीमा पर बड़ा संकट, बाढ़ के बाद तातोपानी नाका भी बंद, व्यापार ठप.

नेपाल और चीन के बीच व्यापार का मुख्य जरिया माने जाने वाले सीमा नाके लगातार बंद होने से कारोबारियों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। बाढ़ की वजह से पहले ही रसुवागढी–केरुंग सीमा नाका बंद हो चुका था और अब चीन ने एक और महत्वपूर्ण सीमा नाका तातोपानी को भी पूरी तरह से बंद कर दिया है। चीन की तरफ से यह नाका दोबारा कब खोला जाएगा, इसको लेकर नेपाल सरकार को अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। इस अचानक आए फैसले से दोनों देशों के बीच होने वाला आयात-निर्यात और सामानों की आवाजाही पूरी तरह से प्रभावित हो गई है, जिससे स्थानीय कारोबारियों और आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

तातोपानी नाका बंद होने की पूरी जानकारी

रसुवागढी–केरुंग नाका बंद होने के ठीक तुरंत बाद चीनी पक्ष की ओर से नेपाल को एक पत्र भेजा गया था। इस पत्र में तातोपानी नाका को भी अस्थायी रूप से बंद करने की बात कही गई थी, लेकिन चीन ने इसे बंद करने के पीछे की असली वजह का कोई खुलासा नहीं किया है। ल्हासा स्थित नेपाली महावाणिज्य दूत लक्ष्मीप्रसाद निरौला ने मीडिया को बताया कि उन्हें इस नाके को बंद किए जाने के कारणों और इसे दोबारा शुरू करने की तारीख के बारे में कोई खबर नहीं है। जब रसुवागढ़ी नाका बंद हुआ था, तब नेपाल की तरफ से चीन से अनुरोध किया गया था कि केरुंग में फंसे हुए नेपाली पर्यटकों और मालवाहक कंटेनर ट्रकों को तातोपानी और कोरला नाके के रास्ते सुरक्षित नेपाल आने की अनुमति दी जाए। चीनी प्रशासन ने पर्यटकों को तो तातोपानी नाके के जरिए लौटने की छूट दे दी, लेकिन मालवाहक गाड़ियों और कंटेनरों को लाने की अनुमति नहीं दी गई।

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यात्री वाहनों को छूट लेकिन माल ढुलाई ठप

तातोपानी सीमा शुल्क कार्यालय के प्रमुख दीपेन्द्र प्रकाश गिरी ने जानकारी दी है कि 8 सितंबर से इस नाके के जरिए किसी भी मालवाहक कंटेनर की क्लीयरेंस नहीं हो पाई है। हालांकि, राहत की बात यह है कि यात्री वाहनों को आने-जाने की पूरी अनुमति दी जा रही है। चीनी प्रशासन द्वारा 31 अगस्त को एक पत्र भेजकर तातोपानी नाके को अस्थायी रूप से बंद करने का फरमान सुनाया गया था। इसके अलावा, 4 सितंबर को 'चाइना डेली' में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन नेपाल के साथ लगने वाले एक अन्य प्रमुख व्यापारिक नाके झांगमु में सीमा जांच और कस्टम से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव करने जा रहा है। स्थानीय प्रशासन का ऐसा कहना है कि ऊंचे पहाड़ी इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने तथा यात्रियों और उनके सामान की सुरक्षा को पक्का करने के लिए यह नए नियम लागू किए जा रहे हैं। नई व्यवस्था के तहत अब सीमा पार करने वाले लोगों को केवल तय किए गए रास्तों से ही आने-जाने की अनुमति मिलेगी। वे अपनी मर्जी से निर्धारित क्षेत्र से बाहर नहीं जा सकेंगे और रास्ते में कहीं भी गाड़ी रोकने या किसी अन्य व्यक्ति से संपर्क करने पर पूरी पाबंदी रहेगी।

कोरला नाके का विकल्प और बढ़ती दूरी

रसुवागढी और तातोपानी दोनों मुख्य नाके बंद हो जाने की वजह से नेपाल और चीन के बीच स्थल व्यापार के लिए अब सिर्फ मुस्तांग जिले के कोरला नाके का ही इस्तेमाल किया जा रहा है। लेकिन यह नया विकल्प व्यापारियों के लिए काफी महंगा और लंबा साबित हो रहा है। कोरला नाका राजधानी काठमांडू से रसुवागढी और तातोपानी की तुलना में बहुत दूर है। आंकड़ों के मुताबिक, कोरला से काठमांडू की दूरी लगभग 481 किलोमीटर है, जबकि काठमांडू से तातोपानी की दूरी सिर्फ 124 किलोमीटर और काठमांडू से रसुवागढी की दूरी करीब 160 किलोमीटर पड़ती है। इसके अलावा कोरला से केरुंग की दूरी भी लगभग 600 किलोमीटर बैठती है। नेपाल हिमालय सीमापार वाणिज्य संघ के सचिव भक्त पराजुली के अनुसार, दूरी, समय, परिवहन लागत और बुनियादी सुविधाओं के मामले में तातोपानी नाका कोरला की तुलना में व्यापारियों के लिए बहुत ज्यादा सुविधाजनक था।

व्यापारियों और परिवहन पर भारी असर

नेपाल हिमालय सीमापार वाणिज्य संघ के सचिव ने बताया कि केरुंग से कोरला पहुंचने में ही पूरा एक दिन बर्बाद हो जाता है। सीमा पर जरूरी सुविधाओं और कर्मचारियों की भारी कमी के कारण कस्टम क्लीयरेंस की प्रक्रिया भी एक दिन के भीतर पूरी नहीं हो पाती है। इसके बाद खराब सड़कों और वाहनों की वजह से सामान को काठमांडू पहुंचने में तीन दिन का अतिरिक्त समय लग जाता है, जिससे ट्रांसपोर्ट का खर्च बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। कोरला नाके के रास्ते राजधानी तक माल पहुंचाने में लगभग एक सप्ताह का समय लग जाता है, जबकि अगर तातोपानी नाका खुला रहता है तो चीन के खासा इलाके से सामान मात्र एक दिन में ही काठमांडू पहुंच जाता है। हालांकि कोरला नाके पर चीन की तरफ से तो एक आधुनिक कस्टम ऑफिस बना दिया गया है, लेकिन नेपाल की तरफ अभी तक जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह से तैयार नहीं हो पाया है। नेपाल की सीमा से लगभग 10 से 12 किलोमीटर दूर नेचुड़ में कस्टम ऑफिस बनाया गया है, जहां के कर्मचारी दिनभर सीमा शुल्क से जुड़े काम निपटाकर शाम के समय वापस नेचुड़ लौट जाते हैं।

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