नेपाल में जलवायु न्याय की मांग तेज, बाढ़ पीड़ितों को दी गई श्रद्धांजलि
Nepal activists demand climate justice in Kathmandu following devastating floods and landslides caused by climate change.

दुनियाभर में पर्यावरण बदलाव के गंभीर परिणाम अब साफ तौर पर नजर आने लगे हैं। नेपाल में हाल ही में आए भीषण बाढ़ और प्रलयकारी आपदा के बाद से हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं। इसी बीच, देश की राजधानी काठमांडू में जलवायु कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया है। इन कार्यकर्ताओं का मुख्य उद्देश्य वैश्विक समुदाय का ध्यान इस विकट संकट की ओर आकर्षित करना और प्रभावितों के लिए न्याय की मांग करना है।
काठमांडू के ऐतिहासिक दरबार स्क्वायर पर दर्जनों जलवायु कार्यकर्ताओं ने एकत्र होकर हाथों में तख्तियां थामीं। इसके बाद एक लंबी मानव श्रृंखला बनाई गई और मौन व्रत रखकर आपदा में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। प्राचीन यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल पर कैंडल मार्च निकालकर इन कार्यकर्ताओं ने पूरी दुनिया को कड़ा संदेश दिया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि विकसित देशों ने अब भी कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए कड़े कदम नहीं उठाए, तो आने वाले समय में पूरी दुनिया को नेपाल जैसे ही बुरे हालातों का सामना करना पड़ सकता है।
गौरतलब है कि नेपाल में अगस्त के महीने में एक भारी प्राकृतिक आपदा आई थी, जिसे 'हिमालयी सुनामी' भी कहा जा रहा है। एक बड़े हिमस्खलन और चट्टान खिसकने की घटना के कारण आई इस तबाही ने भारी जान-माल का नुकसान पहुंचाया है। इस आपदा में हजारों लोगों की जान जा चुकी है और बड़ी संख्या में लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। बाढ़ के कारण हजारों परिवार बेघर हो गए हैं और प्रभावित इलाकों में राहत व बचाव कार्य अभी भी जारी हैं।
इस आपदा ने केवल इंसानी जिंदगियों को ही नहीं बल्कि देश के बुनियादी ढांचे को भी पूरी तरह तहस-नहस कर दिया है। कई जलविद्युत परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हो गई हैं और महत्वपूर्ण सड़क मार्ग तथा पुल पूरी तरह बह गए हैं। जानकारों का मानना है कि इस भारी तबाही से उबरने और बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण में लंबा समय और भारी धनराशि खर्च होने की संभावना है। कार्यकर्ताओं की यह आवाज अब केवल नेपाल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी मानव जाति के लिए एक बड़ी चेतावनी है कि प्रकृति के साथ खिलवाड़ का अंजाम कितना भयानक हो सकता है।